नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता के कारण घरेलू वायदा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों पर लगातार बिकवाली का भारी दबाव देखा गया. पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को टालने के संकेतों ने सराफा बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है. निवेशक किसी भी बड़े जोखिम से बचने के लिए फिलहाल सुरक्षित निवेश से दूरी बना रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं में मुनाफावसूली हावी हो गई है.
भारतीय कमोडिटी बाजार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सुबह से ही दोनों कीमती धातुओं में सुस्ती दर्ज की गई. अगस्त डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स सुबह के सत्र में करीब 11:50 बजे 1.37 प्रतिशत या 1,952 रुपये की भारी गिरावट के साथ ₹1,40,450 प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे लो पर आ गया. हालांकि, दोपहर के कारोबार में इसमें मामूली सुधार देखा गया. आखिरी गिनती के समय यह पीली धातु करीब 1 प्रतिशत यानी 1,278 रुपये टूटकर ₹1,41,124 पर ट्रेड कर रही थी. इससे पहले आज का इंट्राडे हाई ₹1,41,501 प्रति 10 ग्राम रहा.
आपके मुख्य शहरों में आज सोने के दाम
देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में टैक्स (जैसे GST) और मेकिंग चार्ज के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर होता है. आज सुबह 11:00 बजे इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के आधार पर जारी किए गए आपके शहरों के ताजा भाव इस प्रकार हैं
चांदी की चमक भी पड़ी फीकी
सोने की राह पर चलते हुए चांदी में भी आज तेज गिरावट का दौर रहा. सितंबर डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स MCX पर 1 प्रतिशत या ₹2,387 से ज्यादा की गिरावट के साथ ₹2,20,247 प्रति किलोग्राम के इंट्राडे लो पर फिसल गया. बाजार बंद होने के समय यह सफेद मेटल ₹2,21,715 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से ₹900 या 0.41 प्रतिशत नीचे है.
क्या कहते हैं बाजार के एक्सपर्ट्स?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों पर दोहरा दबाव काम कर रहा है. पहला कारण पश्चिम एशिया का लगातार बदलता घटनाक्रम है, जिसने वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों को सतर्क कर दिया है. दूसरा और सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति है. वैश्विक बाजारों में अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस साल कम से कम तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी या उन्हें उच्च स्तर पर बनाए रख सकता है, जिसकी शुरुआत सितंबर महीने से होने की पूरी संभावना है. ऊंची ब्याज दरों के माहौल में बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने की मांग आमतौर पर कम हो जाती है. इसके अलावा, निवेशकों की नजरें इस सप्ताह आने वाली अमेरिका की मासिक रोजगार रिपोर्ट पर भी टिकी हैं, जिससे फेड के अगले कदम के ठोस संकेत मिलेंगे.


