झारखंड में नगर निकाय का चुनाव दलगत आधार पर नहीं हो रहा है. लेकिन राजनीतिक दल अपनी अपनी ताकत को साबित करने में लगे हैं. राजनीतिक दल आकलन के बाद प्रत्याशियों को अपना समर्थन दे रहे हैं. झारखंड का मेदिनीनगर नगर निगम काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी एवं महागठबंधन दोनों में टूट नजर आ रही है. नगर निगम क्षेत्र से भाजपा से संबंध रखने वाले चार प्रत्याशियों ने नामांकन किया है.
नगर निगम क्षेत्र से प्रथम में मेयर अरुणा शंकर भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय है, भाजपा के बड़े नेता और प्रथम डिप्टी मेयर मंगल सिंह की पत्नी रिंकू सिंह, जबकि पूर्व जिला अध्यक्ष परशुराम ओझा की पत्नी जानकी ओझा और भाजपा के सदस्य सह पूर्व जिला परिषद सदस्य मीना गुप्ता ने नामांकन किया है.

दरअसल पलामू का इलाका भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ है. मेदिनीनगर से विधायक आलोक चौरसिया और स्थानीय सांसद विष्णुदयाल राम भाजपा से है. मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में सबसे अधिक भाजपा में टूट दिख रही है. हालांकि पार्टी ने मान मनौव्वल शुरू किया है.
भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है. पार्टी समर्थित प्रत्याशी अरुणा शंकर हैं. सभी को मनाने का प्रयास किया जा रहा है. प्रयास है सभी एक होकर चुनाव लड़े बातचीत जारी है: अमित तिवारी, जिला अध्यक्ष, बीजेपी
झारखंड मुक्ति मोर्चा एवं कांग्रेस से अलग-अलग प्रत्याशी
मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में महागठबंधन भी टूटती हुई नजर आ रही है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पूनम सिंह को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया है जबकि कांग्रेस ने पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी की बेटी नम्रता त्रिपाठी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया है. केएन त्रिपाठी कांग्रेस में एक बड़ा नाम है और डालटनगंज से विधायक रहते हुए झारखंड सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे हैं.
रामगढ़
रामगढ़ में लोकतंत्र के पर्व नगर परिषद क्षेत्र के लिए वार्ड पार्षद एवं अध्यक्ष के नामांकन का आज अंतिम दिन था. सियासी फिजा पूरी तरह गर्म दिख रही थी. अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को बीजेपी द्वारा समर्थन देने की बात कही गई तो किसी उम्मीदवार को आजसू द्वारा समर्थन देने की बात कही गई तो किसी उम्मीदवार को कांग्रेस द्वारा समर्थन देने की बात कही गई और इसी को लेकर शक्ति प्रदर्शन के रूप में भीड़ और गाजे बाजे के साथ प्रत्याशियों ने नामांकन किया.

जिला परिषद कार्यालय के बाहर नगर की सरकार में अपनी दावेदारी के लिए प्रत्याशियों का जुनून और जोश देखने को मिला है. साथ ही उसने साफ कर दिया है कि इस बार का नगर परिषद चुनाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि सीधी टक्कर और प्रतिष्ठा की जंग बनने जा रही है. गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और हजारों समर्थकों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है.
गाजे बाजे के साथ नामांकन करने पहुंचे प्रत्याशी
सुबह से ही जिला परिषद कार्यालय के बाहर और नामांकन कक्ष पर प्रत्याशियों और समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा. नारों की गूंज, बाजा गाजा की लहर और शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला. नामांकन वाले दिन के आंकड़े बताते हैं कि इस बार मुकाबला कितना दिलचस्प होने वाला है. करीब 261 वार्ड पार्षद प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र खरीदा था और अंतिम दिन तक 228 लोगों द्वारा नामांकन किया गया जबकि 11 उम्मीदवारों ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र लिया था, जिसमें से 10 प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल कर सत्ता की कुर्सी पर अपनी दावेदारी ठोक दी है. स्क्रूटनी और नाम वापसी के बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे.
हर प्रत्याशी खुद को जनता का सच्चा हितैषी और विकास का वाहक बताने में जुटा रहा. दिग्गजों की मौजूदगी से बढ़ा सियासी तापमान. नामांकन के दौरान आजसू मांडू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो की मौजूदगी ने माहौल को और भी गरमा दिया. दूसरी ओर रामगढ़ विधायक ममता देवी भी अध्यक्ष पद की उम्मीदवार के समर्थन में नामांकन स्थल तक पहुंचीं. बड़े नेताओं के साथ आने से समर्थकों में जोश चरम पर दिखा.
गिरिडीह में मेयर पद के लिए 20 प्रत्याशियों ने नामांकन पर्चा दाखिल किया है. गिरिडीह नगर निगम में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है. अब सूक्ष्म परीक्षण और नाम वापसी के बाद बचे प्रत्याशी के बीच चुनावी जंग शुरू होगी. शहर का मेयर (महापौर) का पद आरक्षित है और नामांकन के अंतिम दिन 4 फरवरी तक इस पद के लिए 20 लोगों ने पर्चा दाखिल किया है. जिन लोगों ने नामांकन दाखिल किया है, उनमें से कई झारखंड मुक्ति मोर्चा तो कई भाजपा से हैं. वहीं कुछ ऐसे प्रत्याशी हैं जिनका संबंध अलग-अलग राजनीतिक दलों से हैं. अब देखना होगा कि नाम वापसी तक कितने प्रत्याशी मैदान में डटे रहते हैं.

अर्जुन बैठा ने ठोकी ताल, कहा जनता का पूरा समर्थन
बुधवार को जिले के चर्चित राजनीतिक चेहरा अर्जुन बैठा ने नामांकन पर्चा दाखिल किया. नामांकन पर्चा दाखिल करते ही महापौर का चुनाव रोचक हो गया है. लोगों के बीच बेहतर पकड़ रखने वाले अर्जुन बैठा ने नामांकन के बाद पत्रकारों से बात की और कहा कि शहर को समस्या मुक्त करने के लिए वे मैदान में उतरे हैं. उन्होंने आगे कहा कि जनता का पूरा समर्थन उनके साथ है.

कामेश्वर हुए बागी
बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश स्तरीय नेता कामेश्वर पासवान ने भी बुधवार को नामांकन पर्चा दाखिल किया. इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर आस्था जताते हुए कहा कि दलगत तरीके से चुनाव नहीं हो रहा है. ऐसे में उन्होंने नामांकन दाखिल किया है. वैसे भी यह जंग गरीब गुरबों को हक दिलाने की है, जो लोग एसी कमरे में बैठकर माऊस से कम्प्यूटर पर काम करते हैं उनके लिए यह चुनाव नहीं है. यह चुनाव उसके लिए है जो सालभर जनता के लिए खड़ा रहता है.
नजदीक से देखा है जनता का दर्द: पप्पू
झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े निवर्तमान वार्ड पार्षद पप्पू रजक ने भी मेयर के लिए नामांकन पर्चा दाखिल किया है. इनका कहना है कि वे पहले मुखिया रह चुके हैं फिर वार्ड पार्षद बने है. उन्होंने लोगों की समस्या को नजदीक से देखा है. वे फुटपाथी दुकानदार का भी दर्द समझते हैं. उन्हें पता है कि सीसीएल क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आवास नहीं मिला है. वे इस दिशा में काम करने के लिए ही मेयर पद के लिए मैदान में उतरे हैं. जनता का समर्थन उन्हें पूरा मिल रहा है.
इन्होंने भरा नामांकन
गिरिडीह नगर निगम के लिए नामांकन भरने वालों में अर्जुन बैठा, प्रमिला मेहरा, डॉ. शैलेंद्र चौधरी, कामेश्वर पासवान, पप्पू रजक, गौरव कुमार, समीर राज चौधरी, नागेश्वर दास, जीवन कुमार दास, प्रकाश कुमार दास, फूल देवी, योगेश्वर महथा, बनारसी लाल दास, अनिल कुमार दास, पंकज कुमार सागर, बृजमोहन तुरी, गोविंद तुरी, दयानंद निरंजन, कृष्णा तुरी और प्रदीप पासवान शामिल हैं.
दुमका
झारखंड की उप राजधानी दुमका का नगर परिषद चुनाव इस बार काफी दिलचस्प होने जा रहा है. नामांकन की समय सीमा बीतने के बाद अध्यक्ष पद के लिए 19 प्रत्याशियों ने नॉमिनेशन किया है. इसमें सिर्फ 1 महिला और 18 पुरुष उम्मीदवार मैदान में हैं. अब आने वाले 27 फरवरी को पता चलेगा कि कौन किस पर भारी पड़ेगा.

आइये ये जानते हैं कि इतने पुरुष अभ्यर्थी क्यों उतर गए मैदान में?
नॉमिनेशन के अंतिम दिन की समय सीमा पूरी होने के बाद दुमका नगर परिषद का अध्यक्ष बनने के लिए डेढ़ दर्जन पुरुष मैदान में उतर गए हैं. इसकी वजह भी बड़ी है. दरअसल, लगातार तीन बार के नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष का पद महिला के लिए रिजर्व कर दिया गया था, जिस वजह से चाहकर भी पुरुष अभ्यर्थियों को चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं मिला है.
तीन बार से महिला ने ही अध्यक्ष के सम्मानित पद को संभाला है. इस बार 2026 के दुमका नगर परिषद चुनाव में आयोग ने अध्यक्ष का पद अनारक्षित कर दिया. मतलब कोई भी कैंडिडेट नॉमिनेशन भर सकता है तो मौका मिलते ही पुरुष उम्मीदवारों की लंबी सूची तैयार हो गई और 18 पुरुष मैदान में उतर गए है. हालांकि एक महिला कैंडिडेट ने भी पर्चा दाखिल किया है.


