कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के वैज्ञानिकों की अगुवाई में खगोलशास्त्रियों की एक टीम ने अंतरिक्ष में एक बेहद धुंधली और दुर्लभ गैलेक्सी यानी आकाशगंगा खोजी है. इस गैलेक्सी का नाम CDG-2 है. यह खोज इसलिए खास है क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि यह अब तक मिली सबसे ज्यादा डार्क मैटर से भरी गैलेक्सियों में से एक हो सकती है.
बता दें कि CDG-2 गैलेक्सी Perseus Cluster में स्थित है, जिसकी पृथ्वी से दूरी 30 करोड़ प्रकाश वर्ष (30 Crore Light Years) है. आमतौर पर आकाशगंगाएं अरबों तारों की चमक से जगमगाती हैं, लेकिन CDG-2 बेहद कम रोशनी छोड़ती है. इसमें गिने-चुने हल्के तारे हैं और इसका ज्यादातर हिस्सा डार्क मैटर से बना है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसकी कुल द्रव्यमान का लगभग 99% हिस्सा डार्क मैटर है.
यह रिसर्च एक प्रतिष्ठित जर्नल The Astrophysical Journal Letters में पब्लिश हुई है. डार्क मैटर को एक अदृश्य (दिखाई न देने वाला) पदार्थ माना जाता है, जो ब्रह्मांड की कुल पदार्थ मात्रा का लगभग 85% है और और गुरुत्वाकर्षण के जरिए आकाशगंगाओं को एक साथ बांधे रखता है. CDG-2 की खोज पारंपरिक तरीके से नहीं हुई.
CDG-2 की डिटेल्स
वैज्ञानिकों ने सीधे रोशनी खोजने की बजाय ग्लोब्युलर क्लस्टर्स पर ध्यान दिया. ये तारों के घने गोलाकार समूह होते हैं, जो किसी आकाशगंगा के आसपास चक्कर लगाते हैं. शोधकर्ता डेविड ली और उनकी टीम ने एडवांस रिकॉर्ड्स के विश्लेषण से पहले से पता चली 10 धुंधली आकाशगंगाओं और दो नए संभावित “डार्क गैलेक्सी” उम्मीदवारों की पहचान की, जिनमें CDG-2 भी शामिल है.
इसकी पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों ने नासा के Hubble Space Telescope, European Space Agency के Euclid और हवाई स्थित Subaru Telescope से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया. हबल की तस्वीरों में चार ग्लोब्युलर क्लस्टर्स का एक छोटा समूह दिखा, जिसके आसपास हल्की सी चमक नजर आई. इसी से एक छिपी हुई आकाशगंगा के अस्तित्व का मजबूत संकेत मिला.
शुरुआती स्टडी के मुताबिक, CDG-2 की चमक करीब 60 लाख सूरज जैसे तारों के बराबर है. हैरानी की बात यह है कि इसकी दिखने वाली सतह का 16% हिस्सा सिर्फ ग्लोब्युलर क्लस्टर्स से बना है. वैज्ञानिकों का मानना है कि दूसरे पिंडों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से इसमें मौजूद हाइड्रोजन गैस छिन गई, जिससे नए तारों का बनना लगभग रुक गया. आने वाले समय Nancy Grace Roman Space Telescope और Vera C. Rubin Observatory जैसे मिशन और एडवांस मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी ब्रह्मांड की ऐसी और छिपी आकाशगंगाओं को खोजने में मदद करेंगी.


