Thursday, October 1, 2026

पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला, दो महीने बाद खनन किस्त पर ब्याज वसूली का आदेश रद्द.

Share

पटना। खनन पट्टाधारकों से बकाया किस्त पर लगातार ब्याज वसूलने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की डिवीजन बेंच ने खनन विभाग के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनके तहत दो महीने की अवधि समाप्त होने के बाद भी ब्याज की मांग जारी रखी गई थी।

अदालत ने इस मामले में एकल पीठ के पूर्व आदेश को भी निरस्त कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला खनन पट्टाधारकों से जुड़ा है, जिनमें मेसर्स महादेव इंकलेव प्राइवेट लिमिटेड और सैनिक इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। पट्टाधारकों ने विभाग की ओर से बकाया खनन किस्तों पर लगातार ब्याज लगाए जाने को चुनौती दी थी।

उनका कहना था कि बिहार माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स, 1972 के नियम 52(5) के तहत ब्याज की व्यवस्था को दो महीने की अवधि से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

सिंगल बेंच के बाद डिवीजन बेंच में पहुंचा मामला

पट्टाधारकों की याचिका पर पहले एकल पीठ ने 4 फरवरी 2025 को विभागीय कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद संबंधित पक्षों ने लेटर्स पेटेंट अपील के माध्यम से डिवीजन बेंच का रुख किया।

डिवीजन बेंच ने नियम 52(5) में इस्तेमाल किए गए प्रावधानों की व्याख्या करते हुए ब्याज वसूली की अवधि पर विचार किया।

दो महीने के बाद ब्याज जारी रखने पर सवाल

अदालत ने कहा कि नियम में बकाया किस्त पर 24 प्रतिशत साधारण ब्याज दो महीने तक लेने का प्रावधान है। इसके बाद नियम के तहत पट्टा रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने की व्यवस्था है।

कोर्ट ने माना कि नियम में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जिसके आधार पर विभाग दो महीने की अवधि बीतने के बाद अनिश्चितकाल तक ब्याज वसूलता रहे। नियम में जो व्यवस्था दी गई है, उससे आगे कोई अतिरिक्त दायित्व प्रशासनिक स्तर पर नहीं जोड़ा जा सकता।

विभागीय आदेश और अतिरिक्त ब्याज की मांग रद्द

डिवीजन बेंच ने खनन विभाग के 14 सितंबर 2023 के आदेशों को रद्द कर दिया। इसके साथ ही दो महीने की अवधि के बाद लगाए गए अतिरिक्त ब्याज की मांग भी समाप्त कर दी गई।

हालांकि, अदालत ने पट्टाधारकों की मूल देनदारी को खत्म नहीं किया है। बकाया मूल खनन किस्त और निर्धारित शुरुआती दो महीने का ब्याज देय रहेगा।

खनन पट्टाधारकों के लिए महत्वपूर्ण आदेश

हाईकोर्ट के इस फैसले में मुख्य मुद्दा नियम 52(5) के तहत ब्याज वसूली की अवधि था। अदालत ने इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर दो महीने के बाद जारी रखी गई ब्याज मांग को अस्वीकार किया।

फैसले से खनन पट्टाधारकों और विभाग के बीच बकाया किस्त पर ब्याज वसूली की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति सामने आई है।

BHARATSUPRFASTNEWS

Read more

Local News