नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा और विशेष उपायों से कालसर्प दोष सहित राहु-केतु जनित समस्याओं से मुक्ति और सुख-शांति प्राप्त होती है.
देशभर में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में यह दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह नाग देवताओं की पूजा-अर्चना का दिन है. इस वर्ष नाग पंचमी का विशेष संयोग मंगला गौरी व्रत के साथ बन रहा है, जो ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायक माना गया है.
ज्योतिष शास्त्र में नाग पंचमी को कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष, और अन्य ग्रह दोषों से मुक्ति के लिए श्रेष्ठ दिन माना गया है. इस दिन विशेष पूजा और उपाय करके व्यक्ति जीवन की कई बाधाओं से निजात पा सकता है.
“इस बार नाग पंचमी पर मंगला गौरी व्रत का संयोग बनना अत्यंत दुर्लभ है. ऐसे में यह दिन केवल सांपों की पूजा का नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करने का एक ज्योतिषीय अवसर है. विशेषकर जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष, राहु-केतु की अशुभ दशा या ग्रहों की अकारात्मक स्थिति है, वे उपरोक्त उपायों से लाभान्वित हो सकते हैं. प्रदोष काल का शिव पूजन और राहु-केतु मंत्र जाप इस दिन सबसे ज्यादा प्रभावी रहता है.”
नाग पंचमी का पौराणिक महत्व
नाग पंचमी का उल्लेख स्कंद पुराण, नारद पुराण और महाभारत में मिलता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन नागों की पूजा करने से उनके प्रकोप से रक्षा होती है और जीवन में सुख-शांति आती है. विशेष रूप से जो लोग कालसर्प दोष से पीड़ित हैं, उनके लिए यह दिन अत्यंत शुभ है.
प्रमुख उपाय जो नाग पंचमी की रात को किए जाएं
शिव पूजन और राहु-केतु मंत्र जाप
नाग पंचमी के दिन प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, दूध चढ़ाकर पूजन करें. इसके बाद शिवालय में बैठकर राहु और केतु के बीज मंत्र का जाप करें. यह उपाय कालसर्प दोष को शांत करने में सहायक होता है.
राहु मंत्र: “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नमः.”
केतु मंत्र: “ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नमः.”
भैरव बाबा की रात्रि पूजा
नाग पंचमी की रात काल भैरव जी की विशेष पूजा करें. उन्हें कच्चा दूध, इमरती, पूड़ी, मदिरा, नारियल, पान आदि का भोग लगाएं. चौमुखी दीपक जलाकर उनकी आरती करें. कुत्तों को रोटी खिलाएं और जरूरतमंदों को दान दें. इससे व्यक्ति को भय, मानसिक तनाव और अशांति से मुक्ति मिलती है.
मंदिर की सीढ़ियों पर सफाई करना
शाम के समय किसी शिव मंदिर या नाग मंदिर की सीढ़ियों पर झाड़ू लगाएं. यह सेवा कार्य माना जाता है और इससे पापों का नाश होता है. कुंडली में मौजूद दोष, विशेषकर राहु-केतु जनित दोष, शांत होते हैं. पीपल के वृक्ष के नीचे दीपदान और परिक्रमा शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे एक दोने में कच्चा दूध रखें. आटे का दीपक बनाएं, उसमें घी डालकर जलाएं. फिर उस स्थान की 7 बार परिक्रमा करें और अपने मन की इच्छाएं व्यक्त करें. यह उपाय मनोकामना पूर्ति और धन संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए अत्यंत प्रभावी है.


