Thursday, March 19, 2026

नगर निकाय चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर घमासान मचा हुआ है.

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रांची: गैर दलीय आधार पर चुनाव होने के कारण भाजपा ने बैकडोर से समर्थित उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने का निर्णय क्या लिया, पार्टी के अंदर बगावत तेज हो गई है. हालत यह है कि बैकडोर से नगर निकाय चुनाव में किस्मत आजमाने की चाहत रखने वाले भाजपा नेताओं में होड़ सी मची हुई है. धनबाद, मेदिनीनगर, गढ़वा जैसे नगर निकाय क्षेत्रों में पार्टी द्वारा समर्थित उम्मीदवारों के अलावे भाजपा के कई नेता चुनाव मैदान में उतर आए हैं, जिससे कहीं ना कहीं पार्टी के अंदर असंतोष तेज होता दिख रहा है.

हालांकि प्रदेश से लेकर जिला स्तर पर भाजपा नेताओं के द्वारा डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है. सबसे खराब स्थिति कोयलांचल की है, जहां संजीव अग्रवाल को भाजपा द्वारा समर्थित उम्मीदवार घोषित किए जाने से नाराज पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल ने पार्टी को बाय-बाय करके झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया है. वहीं पूर्व विधायक संजीव सिंह द्वारा भी नामांकन दाखिल किया गया है.

डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा

पार्टी के अंदर मचे घमासान को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुट गई है. पार्टी के प्रदेश स्तर के नेता और जिला कमेटी को विशेष रूप से जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी के अंदर मचे घमासान पर वरिष्ठ भाजपा नेता और रांची विधायक सीपी सिंह कहते हैं कि अभी वक्त है और उम्मीद है कि सब कुछ सामान्य हो जायेगा. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि एक घाट का पानी पीने वाले को ही स्थान मिले, यानी पार्टी के लिए जो समर्पित हो उसी को तरजीह दी जाए. जब कभी भी दूसरे दल के नेता या कार्यकर्ता पार्टी शामिल होते हैं तो मैं यही कहता हूं कि पतिव्रता स्त्री की तरह आप पार्टी के लिए भरोसेमंद रहें और समर्पित रहें.

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