कोरोना महामारी के दौरान मजबूरी में अपनाया गया वर्क-फ्रॉम-होम और हाइब्रिड मॉडल अब कानूनी मान्यता की ओर बढ़ चुका है. श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत लाए गए नए लेबर कोड्स में घर से काम (Work From Home) और हाइब्रिड वर्क सिस्टम को आधिकारिक पहचान दी गई है. इसका सबसे अधिक असर आईटी और सर्विस सेक्टर पर पड़ने वाला है, जहां लंबे समय से लचीले कार्य मॉडल की मांग की जा रही थी.
क्या है बड़ा बदलाव?
अब तक वर्क-फ्रॉम-होम कई कंपनियों की आंतरिक नीति का हिस्सा था, लेकिन कानून में इसकी स्पष्ट परिभाषा नहीं थी.
- नए लेबर कोड्स के तहत इसे वैध कार्य व्यवस्था के रूप में स्वीकार किया गया है.
- घर से या हाइब्रिड मॉडल में काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे.
- सैलरी, छुट्टियों और अन्य लाभों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
- कंपनी और कर्मचारी के बीच विवाद की स्थिति में कानूनी आधार मौजूद रहेगा.
- काम के घंटे और शर्तों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा.
IT सेक्टर को सबसे ज्यादा लाभ
आईटी और टेक सेक्टर में हाइब्रिड मॉडल पहले से लोकप्रिय रहा है. कई मल्टीनेशनल कंपनियां इसे लागू कर चुकी हैं. अब कानूनी मान्यता मिलने से कर्मचारियों का भरोसा बढ़ेगा. उन्हें यह चिंता नहीं रहेगी कि घर से काम करने पर प्रमोशन, बोनस या अन्य लाभों में कटौती होगी.
लेबर कोड्स के तहत पीएफ, ग्रेच्युटी, बोनस और लीव बेनिफिट्स पहले की तरह मिलते रहेंगे. इससे कर्मचारियों को लचीलापन और सुरक्षा दोनों मिलेंगे, जबकि कंपनियां भी ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी.
बिजनेस कंटिन्यूटी को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि हाइब्रिड मॉडल से बिजनेस कंटिन्यूटी मजबूत होती है. महामारी, प्राकृतिक आपदा या ट्रैफिक प्रतिबंध जैसी स्थितियों में भी काम प्रभावित नहीं होगा. इससे कंपनियां अपने वैश्विक ग्राहकों को निरंतर सेवाएं दे सकेंगी. भारत पहले से ही आईटी सेवाओं का बड़ा केंद्र है. लचीली कार्य प्रणाली से देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और बढ़ेगी.
वर्क-लाइफ बैलेंस पर सकारात्मक असर
हाइब्रिड मॉडल का एक प्रमुख फायदा बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस है. रोजाना लंबा ट्रैफिक झेलने की समस्या कम होगी, जिससे कर्मचारियों का तनाव घटेगा और उत्पादकता बढ़ेगी. हालांकि, कंपनियों को स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने होंगे ताकि वर्क-फ्रॉम-होम का मतलब 24 घंटे उपलब्ध रहना न हो. काम के घंटे, ओवरटाइम और डिजिटल मॉनिटरिंग के बीच संतुलन जरूरी होगा.
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
सरकार इन श्रम सुधारों को आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा बता रही है. लक्ष्य है एक आधुनिक, डिजिटल और वैश्विक जरूरतों के अनुरूप श्रम बाजार तैयार करना. नए लेबर कोड्स से लचीलापन और अधिकारों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे कर्मचारी और उद्योग दोनों को लाभ मिल सके.


