धनबादः जैसे-जैसे खनन का काम गहराई में जा रहा है, वैसे-वैसे सुरक्षा और स्थिरता की चुनौतियाँ भी बढ़ती जा रही हैं. भूमिगत खदानों में चट्टानों का व्यवहार समझना और वैज्ञानिक तरीके से खदान का डिज़ाइन तैयार करना आज समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है. खनन में छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.
ऐसे में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक समझ के जरिए खदानों को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी है. इसी विषय पर विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और खनन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए. सीएसआईआर–केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (CSIR-CIMFR), धनबाद में पांच दिवसीय कार्यकारी विकास कार्यक्रम “रॉक मेकैनिक्स और न्यूमेरिकल मॉडलिंग (ROCKNUM-2026)” आयोजित किया गया है. इसमें देशभर से खनन कंपनियों 34 प्रतिनिधि शामिल हुए. इनमें Adani, Vedanta, Tata Steel, BCCL, SCCL सहित कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं. यह आयोजन सुरक्षित और वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है.

विशेषज्ञों ने बताया कि आज के दौर में केवल पुराने तरीकों से खनन करना पर्याप्त नहीं है. गहरी खानों, जटिल भू-रचनाओं और बढ़ते दबाव के कारण नई तकनीकों को अपनाना अनिवार्य हो गया है. रॉक मेकैनिक्स और न्यूमेरिकल मॉडलिंग जैसी वैज्ञानिक विधियाँ खदानों में सुरक्षा, बेहतर ग्राउंड कंट्रोल और टिकाऊ खनन के लिए अहम भूमिका निभा रही हैं.
खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के उपमहानिदेशक मुरलीधर बिड़ारी ने कहा कि आधुनिक खनन में जोखिम का पहले से आकलन करना और हादसों को रोकने के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि खनन से जुड़े नियम समय के साथ बदले हैं और आज के नियम “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के अनुरूप सुरक्षित और जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देते हैं.
सीएसआईआर-सीआईएमएफआर के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा कि खनन भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. ऊर्जा, उद्योग और बुनियादी ढांचे के लिए खनन पर देश की बड़ी निर्भरता है. भविष्य में खनन का बड़ा हिस्सा भूमिगत होगा, ऐसे में वैज्ञानिक समझ और आधुनिक तकनीक के बिना सुरक्षित खनन संभव नहीं है.
वहीं, प्रो. डीडी मिश्रा, अध्यक्ष, अनुसंधान परिषद, CSIR-CIMFR ने कहा कि आज की गहरी और जटिल खदानों में सुरक्षित और टिकाऊ डिजाइन के लिए रॉक मेकैनिक्स और न्यूमेरिकल मॉडलिंग का सही उपयोग जरूरी है. इसमें केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि जमीनी अनुभव भी उतना ही जरूरी है


