धनबादः आईआईटी आईएसएम में आज गुरुवार से दो दिन का नेशनल सिम्पोजियम ऑन क्रिटिकल मिनरल एक्सप्लोरेशन (NSCME-2026) शुरू हुआ. यह कार्यक्रम गोल्डन जुबली लेक्चर थिएटर में आयोजित किया जा रहा है. इसमें देशभर से वैज्ञानिक, इंडस्ट्री एक्सपर्ट, पॉलिसी मेकर और रिसर्चर शामिल हुए हैं.
यह आयोजन अप्लाइड जियोलॉजी विभाग की ओर से किया जा रहा है, जिसमें कई सरकारी संस्थानों और प्रोजेक्ट्स का सहयोग मिल रहा है. सिम्पोजियम के कन्वीनर प्रो. अलिक सुंदर मजूमदार ने कहा कि आज के समय में क्रिटिकल मिनरल्स बहुत जरूरी हो गए हैं. इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा और देश की सुरक्षा से जुड़े कामों में होता है. इसलिए इनकी खोज और नई तकनीक पर काम करना जरूरी है.
विभागाध्यक्ष प्रो. शुशांत सारंगी ने कहा कि भारत जैसे तेजी से आगे बढ़ रहे देश के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान और उनका सही उपयोग बेहद जरूरी है. अगले दो दिनों में इस विषय पर विस्तार से चर्चा होगी. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि ऐसे सिम्पोजियम से विशेषज्ञों को अपने अनुभव साझा करने का मौका मिलता है. इससे छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को भी सीखने का अवसर मिलता है.

कोल इंडिया लिमिटेड के राजीव कुमार सिंह ने कहा कि भारत में क्रिटिकल मिनरल्स की खोज अभी शुरुआती स्तर पर है और इसे तेज करने की जरूरत है. वहीं CSIR-CIMFR के निदेशक प्रो. एके मिश्रा ने कहा कि अगर संस्थान, उद्योग और सरकार मिलकर काम करें तो इस क्षेत्र में तेजी आ सकती है.

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे NCPOR के डायरेक्टर डॉ. थम्बन मेलोथ ने समुद्र और ठंडे इलाकों में क्रिटिकल मिनरल्स की खोज की संभावनाओं और नई तकनीक की जरूरत पर प्रकाश डाला. इस दौरान सभी अतिथियों को सम्मानित भी किया गया. यह सिम्पोजियम दो दिनों तक चलेगा, जिसमें अलग-अलग सत्रों में चर्चा और शोध प्रस्तुत किए जाएंगे


