नई दिल्ली | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
दिवाली और आगामी त्योहारों के दौरान चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात की समय-सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात पर मिलने वाली छूट अब 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। इससे पहले इसकी समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित थी।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, समय-सीमा को दो महीने बढ़ाया गया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की आशंका को कम करना है। हालांकि, इस फैसले से खुदरा बाजार में चीनी कितनी सस्ती होगी, यह आयात, घरेलू आपूर्ति और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
10 लाख टन चीनी के आयात की समय-सीमा क्यों बढ़ाई गई?
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अगस्त 2026 में 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। हालांकि, तय मात्रा में से अब तक लगभग 2.6 लाख टन चीनी ही भारत पहुंच सकी है।
बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें अधिक होने के कारण भारतीय आयातकों को खरीदारी में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में आयात की समय-सीमा बढ़ने से रिफाइनरियों और कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के अनुसार खरीदारी की योजना बनाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
सरकार को उम्मीद है कि इससे घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
चीनी उत्पादन का अनुमान घटने से बढ़ी चिंता
चीनी के आयात की समय-सीमा बढ़ाने के पीछे घरेलू उत्पादन को लेकर जताई जा रही चिंता भी एक कारण बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केटिंग वर्ष 2025-26 में भारत का चीनी उत्पादन अनुमान घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। इससे पहले उत्पादन का अनुमान 343 लाख टन था।
वहीं, देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग लगभग 280 से 285 लाख टन बताई जाती है। उत्पादन के अनुमान में कमी के बावजूद कुल उपलब्धता का आकलन घरेलू उत्पादन, आयात, शुरुआती स्टॉक और खपत के आधार पर किया जाता है।
त्योहारी मौसम में मांग बढ़ने और आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखने की है।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू
चीनी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए आयात की समय-सीमा बढ़ाने के अलावा स्टॉक लिमिट जैसे कदमों का भी उल्लेख किया गया है। स्टॉक लिमिट का उद्देश्य कारोबारियों के पास चीनी के भंडारण को निर्धारित सीमा के भीतर रखना और बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने में मदद करना है।
हालांकि, स्टॉक लिमिट की वास्तविक सीमा, संबंधित कारोबारियों पर लागू शर्तों और नियमों की जानकारी के लिए सरकारी आदेश देखना जरूरी है।
क्या दिवाली पर सस्ती होगी चीनी?
सरकार के इस फैसले से चीनी की उपलब्धता बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे खुदरा कीमतों में गिरावट की गारंटी नहीं मिलती। बाजार में चीनी के दाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कीमतें, आयात की वास्तविक मात्रा, घरेलू उत्पादन, परिवहन लागत और मांग शामिल हैं।
यदि शुल्क-मुक्त आयात बढ़ता है और घरेलू बाजार में आपूर्ति पर्याप्त रहती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर, आयात महंगा रहने या आपूर्ति में बाधा आने पर खुदरा कीमतों में अपेक्षित राहत सीमित रह सकती है।
कुल मिलाकर, 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समय-सीमा बढ़ाने का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में आपूर्ति बनाए रखना है। इसका आम उपभोक्ताओं को कितना लाभ मिलेगा, यह आने वाले समय में बाजार की स्थिति से स्पष्ट होगा।
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