Friday, March 27, 2026

झारखंड में गिग श्रमिकों के कल्याण के लिए लाए गये विधेयक को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है.

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रांचीः बदलते दौर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सर्विस ने भाग दौड़ भरी जिंदगी को बड़ी राहत दी है. मोबाइल पर एक क्लिक करते ही चंद मिनटों में दरवाजे पर दवाईयां, खाद्य पदार्थ और तमाम जरुरी सामान पहुंच जाते हैं. लेकिन यह किसी ने समझने की कोशिश नहीं की कि जीवन को आसान बनाने वाले गिग श्रमिक किन परेशानियों से जूझते हैं.

इस दर्द को झारखंड सरकार ने महसूस किया है. उनके हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मानसून सत्र में झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिक (निबंधन और कल्याण) विधेयक, 2025 को विधानसभा से पारित कराया था. जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंजूरी दे दी है.

अब गिग श्रमिकों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन का रास्ता साफ हो गया है. इस विधेयक के लागू होने से नियम का उल्लंघन करने वाले एग्रीगेटर को 10 लाख तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. बोर्ड का मुख्यालय रांची में होगा. श्रम विभाग के मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होंगे. इसमें विभागीय सचिव के अलावा पांच अन्य सदस्य होंगे. बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का होगा. बोर्ड के जरिए गिग श्रमिकों का पंजीकरण सुनिश्चित होगा. सर्विस देने वाली कंपनियां या एग्रीगेटर्स का भी पंजीकरण होगा.

अब कार्य के लिए खर्च किए गये समय और तय की गई दूरी के आधार पर न्यूनतम पारिश्रमिक का निर्धारण होगा. सामाजिक सुरक्षा के लिए समय समय पर योजनाएं तैयार की जाएंगी. कल्याण अंशदान की लागत को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से उपभोक्ता या गिग वर्कर्स पर नहीं डालने दिया जाएगा. सभी एग्रीगेटर्स का पंजीकरण अनिवार्य होगा.एग्रीगेटर द्वारा गिग श्रमिकों को शामिल करने वाले परिचालनों से राज्य में अर्जित वार्षिक टर्न ओवर का 02 प्रतिशत से अधिक या 01 प्रतिशत तक कल्याण अंशदान लिया जाएगा.

राज्य सरकार से निबंधन कराने पर एक विशेष आईडी मिलेगी. न्यूनतम पारिश्रमिक के हकदार होंगे. व्यावसायिक रुप से सुरक्षित परिस्थितियों में काम करने का अधिकार मिलेगा. काम की शर्तों या अन्य पैरामीटर पर बोर्ड की सलाह ले सकेंगे. वर्कर को कम से कम साप्ताहिक आधार पर मुआवजा देना होगा.

अधिनियम के नियमों का उल्लंघन करने पर एग्रीगेटर्स पर 50 हजार रु का जुर्माना लगाया जाएगा. दोषसिद्ध होने के बाद भी उल्लंघन जारी रहने पर सुधार होने तक हर दिन 5 हजार रु का जुर्माना लगाया जाएगा. किसी तरह का अपराध किए जाने पर निदेशक, प्रबंधक, कंपनी सचिव या अन्य अधिकारी को दोषी मानते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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