रांची: झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार सह सचिव पद से प्रशांत कुमार पांडेय को हटाने का आदेश जारी किया है। विभाग ने उनकी जगह रंजीत कुमार चौधरी को प्रभारी रजिस्ट्रार सह सचिव नियुक्त किया है। इस फैसले के बाद फार्मेसी काउंसिल और स्वास्थ्य विभाग के बीच विवाद की स्थिति सामने आई है। वहीं प्रशांत पांडेय ने सरकार के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
छह महीने के लिए हुई थी नियुक्ति
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रशांत कुमार पांडेय की नियुक्ति 14 अक्टूबर 2024 को स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार सह सचिव के रूप में छह महीने के लिए की गई थी। विभाग का कहना है कि निर्धारित अवधि के बाद भी उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठे।
मामले को लेकर विधायक सरयू राय ने विधानसभा में सवाल उठाया था। उस समय स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की बात कही थी। कार्रवाई में देरी होने पर सरयू राय ने मंत्री को पत्र लिखकर मामले में कदम उठाने का आग्रह किया था।
अगस्त में हटाने का आदेश, नए प्रभारी ने संभाला पद
स्वास्थ्य विभाग ने 17 अगस्त 2026 को प्रशांत कुमार पांडेय को पद से हटाने का आदेश जारी किया। इसी आदेश के तहत रंजीत कुमार चौधरी को प्रभारी रजिस्ट्रार सह सचिव बनाया गया।
रंजीत चौधरी ने 18 अगस्त को पद पर योगदान भी दिया। इसके बाद प्रशांत पांडेय ने सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
काउंसिल अध्यक्ष के आदेश से कामकाज पर असर
विवाद के बीच फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष विमलेश दूबे ने 22 अगस्त को एक आदेश जारी किया। इसमें रजिस्ट्रार सह सचिव द्वारा किए जाने वाले सभी कार्यों को अगले आदेश तक स्थगित करने की बात कही गई।
इस घटनाक्रम के बाद काउंसिल के कामकाज को लेकर भी स्थिति प्रभावित हुई। खबर के अनुसार अध्यक्ष विमलेश दूबे की नियुक्ति को लेकर भी विवाद का उल्लेख किया गया है और सरकार की ओर से उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी नहीं होने का दावा किया गया है।
हाईकोर्ट में चल रहा मामला
प्रशांत कुमार पांडेय की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा था। विभाग ने अदालत में दाखिल शपथ पत्र में कहा कि पांडेय की नियुक्ति छह महीने के लिए अस्थायी रूप से की गई थी और निर्धारित अवधि के बाद उनके पद पर बने रहने का अधिकार नहीं था।
विभाग ने शपथ पत्र के साथ उनके खिलाफ प्राप्त शिकायतों से संबंधित दस्तावेज भी अदालत में संलग्न किए हैं। वहीं उपलब्ध जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट ने उन्हें पद से हटाने संबंधी सरकार के आदेश पर रोक नहीं लगाई है।
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