रांचीः राज्य में पिछड़ों की आबादी कुल आबादी का लगभग 55% से 56% है. इस वर्ग को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी भी एक बड़ा हिस्सा हाशिए पर है. सरकार द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ समुदायों में बेहद कम संख्या दर्ज की गई है, खासकर कुछ नगर परिषदों में पिछड़ा वर्ग-2 की आबादी लगभग शून्य है. ऐसे में अपने हक की लड़ाई के लिए पिछड़ा वर्ग गोलबंद होने लगे हैं. वैश्य मोर्चा के बैनर तले बड़ा आंदोलन की तैयारी की जा रही है.
झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहू ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जिस तरह से ट्रिपल टेस्ट में ओबीसी का आकलन करने में भेदभाव किया गया है उसके खिलाफ मोर्चा, पिछड़ा वर्ग आयोग में शिकायत दर्ज कराने से लेकर शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा के समक्ष जोरदार आंदोलन करेगा. उन्होंने कहा कि सड़क पर आंदोलन के साथ-साथ हम न्यायिक लड़ाई भी सरकार के खिलाफ लड़ने की तैयारी में हैं और जल्द ही झारखंड हाईकोर्ट में इस संबंध में याचिका दाखिल की जाएगी. उन्होंने कहा कि विडंबना है कि पिछड़ा वर्ग आयोग में एक पिछड़ा समाज का व्यक्ति बैठा है, लेकिन उन्हें पिछड़ों की चिंता नहीं है.
उन्होंने कहा कि वैश्य मोर्चा की मांग और न्यायालय के आदेश पर राज्य में ओबीसी ट्रिपल टेस्ट कराया गया है. जिसमें हमें 14% के हिसाब से राज्य के 48 नगर निकायों में से मात्र 6-7 निकायों में आरक्षण मिलेगा, जबकि हमारा अधिकार 16-17 बन रहा था. इसके अलावा जिन जगहों पर ओबीसी की संख्या है वहां पर उन्हें आरक्षण से वंचित किया जा रहा है. ऐसे में हम अपनी अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन करेंगे. इसके अलावा राज्य में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण और पिछड़ा वर्ग मंत्रालय बनाने की मांग को लेकर मोर्चा के द्वारा आंदोलन तेज किया जाएगा.
वैश्य मोर्चा की केंद्रीय कमेटी की हुई घोषणा
झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा के 71 सदस्यीय केंद्रीय कमेटी की घोषणा की गई है. जिसमें तीन कार्यकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नौ केंद्रीय उपाध्यक्ष सहित केंद्रीय महासचिव प्रधान महासचिव शामिल हैं. केंद्रीय कमेटी की घोषणा करते हुए झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहू ने कहा कि 20 दिसंबर को रजरप्पा में बैठक बुलाई गई है. जिसमें सदस्यों का शपथ ग्रहण होगा और संगठन की मजबूती के लिए रूपरेखा तय की जाएगी.
उन्होंने कहा कि किसी भी लड़ाई को लड़ने के लिए संगठन का मजबूत होना जरूरी है और इस उद्देश्य से केंद्रीय समिति में लोगों को शामिल किया गया है. यह समाज के लिए चिंता करने वाले लोग हैं और वैश्यों के हक, अधिकार, रोजगार और सम्मान की लड़ाई को इनके माध्यम से तेज किया जाएगा.


