रांची: इस साल झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं. झामुमो के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन से एक सीट खाली हो गई है और बीजेपी सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल भी इसी साल खत्म हो रहा है, इसलिए राज्य की सबसे बड़ी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता और कार्यकर्ता चाहते हैं कि दिशोम गुरु की बेटी अंजनी सोरेन को राज्यसभा में जाने का मौका मिले.
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता से लेकर जिला अध्यक्ष और आम कार्यकर्ता तक, सभी का कहना है कि जब सोरेन परिवार का कोई सदस्य राज्यसभा या लोकसभा में राज्य का प्रतिनिधित्व करता है, तो यह पार्टी के लिए सम्मान की बात होती है. गुरुजी के निधन के बाद, दशकों बाद ऐसी स्थित है जब शिबू सोरेन परिवार का कोई भी सदस्य संसद में नहीं है. इसलिए, इस बार राज्यसभा में हर कोई जिस एक नाम को देखना चाहता है, वह है अंजनी सोरेन.
अंजनी सोरेन दिशोम गुरु और रूपी सोरेन की बेटी हैं. शादी के बाद से, वह ओडिशा के मयूरभंज में झारखंड मुक्ति मोर्चा का झंडा उठाकर आदिवासी समाज की आवाज बुलंद कर रही हैं. उन्हें 2019 और 2024 में झामुमो ने ओडिशा विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवार बनाया था. लेकिन अच्छे वोट मिलने के बावजूद वह जीत हासिल नहीं कर पाईं. अब जब दिशोम गुरु शिबू सोरेन नहीं रहे, तो पार्टी के सदस्य चाहते हैं कि उनकी बेटी इस बार झामुमो की ओर से चुनाव जीते और राज्यसभा जाएं.
अंजनी सोरेन को भेजा जाए राज्यसभा – झामुमो नेता
झामुमो के वरिष्ठ नेता पवन जेडिया का कहना है कि अंजनी सोरेन सिर्फ गुरुजी की बेटी नहीं हैं, बल्कि संघर्ष का प्रतीक हैं. अगर पार्टी उन्हें राज्यसभा के लिए चुनती है, तो इससे न सिर्फ झामुमो कार्यकर्ताओं में जोश आएगा, बल्कि ओडिशा में झामुमो संगठन भी मजबूत होगा.
झारखंड मुक्ति मोर्चा के रांची जिला अध्यक्ष मुश्ताक आलम भी चाहते हैं कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की बेटी अंजनी सोरेन को पार्टी की तरफ से राज्यसभा भेजा जाए. मुश्ताक आलम ने कहा कि जब से अंजनी सोरेन ने ओडिशा झामुमो की कमान संभाली है, तब से ओडिशा में पार्टी का संगठन मजबूत हुआ है.
सीएम हेमंत सोरेन को लेना है फैसला- झामुमो प्रवक्ता
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि ऐसा लगता है कि काफी समय हो गया है, जब देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में सोरेन परिवार का कोई सदस्य नहीं है. हालांकि, वह इसे भविष्य के गर्भ में छोड़ देने की बात कहते हैं.
पार्टी सदस्यों की इच्छा और अंजनी सोरेन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने की बढ़ती अटकलों का समर्थन करते हुए, मनोज पांडे ने कहा कि अंजनी सोरेन झामुमो की उम्मीदवार क्यों नहीं होनी चाहिए? उनमें भी दिशोम गुरु शिबू सोरेन का रक्त प्रवाह हो रहा है, उन्होंने गुरुजी के आंदोलन को करीब से देखा है और ओडिशा में पार्टी के लिए संघर्ष किया है. वह राज्यसभा सदस्य बनने की हकदार हैं, लेकिन फैसला पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेना है.
अंजनी सोरेन ने हासिल किए थे अच्छे वोट
2024 में, झामुमो ने अंजनी सोरेन को ओडिशा के मयूरभंज से लोकसभा आम चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया था. जिसमें वह तीसरे स्थान पर रहीं, उन्हें 1,35,399 वोट मिले. 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनावों में, अंजनी सोरेन ने सरसकाना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें 20,725 वोट मिले.
झामुमो के पास राज्यसभा की दोनों सीटें जीतने का मौका
81 विधायकों वाली झारखंड विधानसभा में, सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं (झामुमो-34, RJD 04, कांग्रेस 16 और CPI ML 02). ऐसे में, गठबंधन के पास इस बार राज्यसभा की दोनों सीटें जीतने का मौका है क्योंकि सत्ताधारी गठबंधन के पास जीत के लिए 27+01 का आंकड़ा है.


