Monday, September 14, 2026

झरिया संस्कृत पाठशाला में गणेश चतुर्थी की तैयारी, विद्यार्थियों ने किया श्लोक पाठ और पौधों की देखभाल.

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झरिया: स्टेशन रोड स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर परिसर में संचालित संस्कृत पाठशाला में गणेश चतुर्थी को लेकर शनिवार को विशेष अभ्यास सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भगवान गणेश से जुड़े संस्कृत श्लोकों का सामूहिक और सस्वर पाठ किया। श्लोक पाठ से पाठशाला का माहौल भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा के अभ्यास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां भी करायी गयीं। बच्चों ने संस्कृत अंताक्षरी, पहाड़ा, संभाषण, वार्तालाप और गीतों का अभ्यास किया। संस्कृत प्रशिक्षण अधिवक्ता हरीश कुमार जोशी ने कराया।

कार्यक्रम के अंत में अहमदाबाद के महेशभाई लालजीभाई ठक्कर की ओर से विद्यार्थियों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

बच्चों ने पौधों की भी की देखभाल

पाठशाला में संस्कृत शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है। कुछ दिन पहले वैद्य सुखलाल ने बच्चों के बीच औषधीय पौधे और उनके बीज वितरित किए थे।

शनिवार को विद्यार्थी अपने-अपने गमलों में लगाए गए पौधे लेकर पाठशाला पहुंचे। बच्चों ने पौधों में खाद और पानी डालकर उनकी देखभाल की। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में पौधों के प्रति जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना है।

पौधों को अच्छी तरह विकसित करते देखकर वैद्य सुखलाल ने विद्यार्थियों की सराहना की और उनके प्रयास के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने बच्चों में पर्यावरण के प्रति बढ़ती रुचि को सकारात्मक पहल बताया।

कार्यक्रम में ये विद्यार्थी रहे शामिल

कार्यक्रम में अनन्या कुमारी, त्रिशा कुमारी, चेल्सी गोयल, हर्षिका गोयल, आराध्या वर्मा, शालू कुमारी, किटू कुमारी, कुमकुम कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, परी कुमारी, सानवी कुमारी, सुहानी कुमारी, प्राची कुमारी, खुशी कुमारी, छोटी कुमारी, प्रियांशी कुमारी, दीपिका कुमारी, अनिरुद्ध कुमार, अर्णव कुमार, अनय आनंद तिवारी, ईशांत सिंह, हर्ष कुमार, रितुराज कुमार, राजवीर कुमार, उज्ज्वल कुमार, अभी कुमार, शिवांश कुमार, दिव्यांश कुमार, लवयांश कुमार, सूरज ठक्कर, अनमोल कुमार, रितिक कुमार, श्लोक कुमार, सत्या गुप्ता और युगवीर साव समेत कई विद्यार्थी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में संस्कृत अभ्यास के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने से विद्यार्थियों में धार्मिक-सांस्कृतिक शिक्षा के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

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