कई भारतीय घरों में अंडे नाश्ते का एक जरूरी हिस्सा होते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि वे प्रोटीन, हेल्दी फैट और ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. इसके अलावा, उनमें कोलीन, सेलेनियम, फोलेट और आयरन और बायोटिन जैसे मिनरल और B12, A, D, E और K जैसे विटामिन भी होते हैं. हालांकि बहुत से लोग अंडे पकाकर खाना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ फिटनेस के शौकीनों का मानना है कि कच्चे अंडे खाने से प्रोटीन और दूसरे पोषक तत्व बचे रहते हैं जबकि उबालने से वे खत्म हो जाते हैं.
डॉ. अंशुमान कौशल ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साफ किया कि ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि सब जानते हैं कि कच्चे अंडे खाना खतरनाक है. लेकिन, फिर भी ज्यादातर जिम जाने वाले या फिटनेस फ्रीक कच्चे अंडे खाते हैं. उन्होंने आगे कहा कि यह एक बड़ा मिथक है कि कच्चे अंडे से ज्यादा प्रोटीन मिलता है. कच्चे या अधपके अंडे खाने से साल्मोनेला बैक्टीरिया के कारण गंभीर फूड पॉइजनिंग, दस्त, बुखार और पेट में ऐंठन का खतरा रहता है. फिर भी, जापान में हर दिन लाखों लोग गर्म चावल के कटोरे पर एक कच्चा अंडा फोड़कर खाते हैं. ऐसे में जानिए क्या जापानियों को कच्चा अंडा खाने से फूड पॉइजनिंग क्यों नहीं होती है? जापानी लोग कच्चा अंडा खाना सुरक्षित क्यों महसूस करते हैं?
डॉ. अंशुमान कौशल ने 1998 में जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में छपी एक मशहूर बेल्जियन स्टडी का जिक्र करते हुए कहा कि स्टडी के मुताबिक अंडे पकाने पर 91 परसेंट प्रोटीन एब्जॉर्ब हो जाता है. लेकिन कच्चे अंडों में एब्जॉर्प्शन सिर्फ 51 परसेंट होता है. मतलब, कच्चे अंडे से ज्यादा प्रोटीन मिलने का दावा अक्सर एक झूठ होता है क्योंकि कच्चा अंडा पके हुए अंडे की तुलना में कम प्रोटीन सोखता है. पका हुआ अंडा, खासकर आधा उबला अंडा, ज्यादा प्रोटीन पचाता है (लगभग 90 फीसदी), जबकि कच्चा अंडा सिर्फ 50 फीसदी से 51फीसदी ही सोख पाता है.
जापान में कच्चे अंडे खाना क्यों माना जाता है सुरक्षित
जापान में कच्चे अंडे खाना पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यह वहां की स्थानीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है, ‘तमागो काके गोहान’ नाम का एक मशहूर व्यंजन, जिसमें गर्म चावलों पर कच्चे अंडे और सोया सॉस डाला जाता है, वहां की खान-पान की विरासत का एक मुख्य हिस्सा है. विदेशियों के लिए यह बात हैरानी की हो सकती है, क्योंकि कई देशों में कच्चे अंडों में पाए जाने वाले ‘साल्मोनेला’ बैक्टीरिया से होने वाली फूड पॉइजनिंग का डर रहता है, हालांकि, जापानी लोग खुद को इसलिए सुरक्षित महसूस करते हैं, क्योंकि अंडे के उत्पादन से लेकर उसकी पैकेजिंग तक, हर चरण पर बेहद कड़े नियम लागू होते हैं.
जापान में कच्चे अंडे खाना सुरक्षित माना जाता है क्योंकि वहां प्रोडक्शन से लेकर टेबल तक बहुत सख्त कंट्रोल सिस्टम लागू किया जाता है. मुर्गियों का वैक्सीनेशन, लेटेस्ट क्लीनिंग मशीनरी से अंडों को धोना, और तेजी से डिस्ट्रीब्यूशन से साल्मोनेला बैक्टीरिया का खतरा बहुत कम हो जाता है.
- हेल्थ पर सख्त कंट्रोल: मुर्गियों को साल्मोनेला के खिलाफ वैक्सीन लगाई जाती है, जिससे अंडे के अंदर बैक्टीरिया पनपने की संभावना खत्म हो जाती है.
- एडवांस्ड सैनिटाइजेशन प्रोसेस: इकट्ठा करने के बाद, अंडों को गंदगी और बैक्टीरिया हटाने के लिए गर्म पानी और डिसइंफेक्टेंट से अच्छी तरह धोया जाता है. फिर उन्हें सुखाया जाता है और बचे हुए माइक्रोऑर्गेनिज्म को खत्म करने के लिए अल्ट्रावॉयलेट लाइट में रखा जाता है. यह प्रोसेस शेल के जरिए अंडे में साल्मोनेला के घुसने के खतरे को काफी कम कर देता है.
- हाई-टेक स्क्रीनिंग- हर अंडे को ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल करके ध्यान से जांचा जाता है. सेंसर छोटी-छोटी दरारें या अंदर की गड़बड़ियों, जैसे खून के धब्बे, का भी पता लगा लेते हैं. कोई भी अंडा जो सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड को पूरा नहीं करता है, उसे तुरंत सप्लाई चेन से हटा दिया जाता है.
- फार्म लेवल पर बीमारी का कंट्रोल- सेफ्टी की शुरुआत मुर्गियों से ही होती है. जापान में फार्म में साफ-सफाई के कड़े स्टैंडर्ड फॉलो किए जाते हैं, और मुर्गियों को बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाने के लिए रेगुलर वैक्सीन लगाई जाती है. वर्कर्स को एनवायरनमेंट में गंदगी फैलाने से बचने के लिए साफ-सफाई के कड़े तरीकों का पालन करना सिखाया जाता है. इस वजह से, अंडों के अंदर से खराब होने का चांस बहुत कम होता है.
- कच्चा खाने पर कम शेल्फ लाइफ- जापान में अंडे के कार्टन की डेट के काम कम होती है (आमतौर पर लगभग दो हफ्ते). दिलचस्प बात यह है कि यह तारीख अंडों को सुरक्षित रूप से कच्चा खाने की डेडलाइन बताती है, न कि उनके खराब होने की तारीख. इस समय के बाद भी, अंडे खाने के लिए सुरक्षित होते हैं लेकिन आमतौर पर उन्हें पकाकर खाया जाता है.
- पूरी तरह से ट्रेस किया जा सकता है- हर अंडे या पैकेज को उसके ओरिजिन तक ट्रेस किया जा सकता है, जिसमें फार्म और प्रोडक्शन की तारीख भी शामिल है. यह ट्रांसपेरेंसी अकाउंटेबिलिटी पक्का करती है और हाई सेफ्टी स्टैंडर्ड बनाए रखती है, क्योंकि अगर कोई दिक्कत आती है तो प्रोड्यूसर को सख्त नतीजे भुगतने पड़ते हैं.
जापान में कच्चे अंडे खाना किस्मत की बात नहीं है, बल्कि यह पूरी सप्लाई चेन व्यवस्था में सावधानी, कंट्रोल, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और कड़े नियमों का नतीजा है. हेल्दी मुर्गियों को पालने से लेकर अंडों को डिसइंफेक्ट करने और एक्सपायरी के कड़े नियमों को लागू करने तक, हर कदम कंज्यूमर की सुरक्षा के लिए बनाया गया है. जो दूसरी जगहों पर रिस्की हो सकता है, वह जापान के बहुत ज्यादा डिसिप्लिन्ड फूड सेफ्टी सिस्टम की वजह से सुरक्षित है


