Tuesday, January 27, 2026

जानें कैसे होगा मंत्री पदों का बंटवारा – बिहार में सरकार गठन का फॉर्मूला तय

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया और एनडीए गठबंधन ने चुनाव में 202 सीटें ज

भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में सरकार गठन का जो फॉर्मूला तय किया है, वो लंबे समय से चली आ रही रणनीति पर आधारित है. यह सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने और बूथ-स्तरीय संगठन पर जोर देता है. पार्टी ने ओबीसी, ईबीसी और अति पिछड़ा वर्गों के बीच गहन पहुंच बनाई, जिससे आरजेडी जैसी पार्टियों का वोट बैंक कमजोर हुआ.

2020 के चुनावों में भाजपा ने जेडीयू से ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद नीतीश कुमार को समर्थन देकर ‘सहयोगी’ की छवि बनाई, लेकिन 2025 में प्री-पोल गठबंधन में 101 सीटों की मांग कर समान साझेदार का दर्जा हासिल किया. अब सरकार गठन में भाजपा का मुख्य फॉर्मूला भी सामने आ रहा है.

‘6 विधायकों पर एक मंत्री’
पार्टी सूत्रों की माने तो मंत्रिमंडल वितरण में प्रत्येक दल को उसके विधायकों की संख्या के आधार पर मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी दी जाएगी. इसके तहत हर 6 विधायकों पर एक मंत्री होगा. इस आधार पर लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), हम (एस) और आरएलएम को एक-एक बर्थ, जबकि भाजपा और जेडीयू के बीच 30-31 पद बंटेंगे. उपमुख्यमंत्री पदों पर भी समायोजन संभव है, ताकि छोटे सहयोगी दलों को भी महत्व मिले. हालांकि स्पीकर पद पर बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दावा कर रहीं है

पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा विधानसभा स्पीकर पद पर कायम रहना चाहती है, जो वर्तमान में उसके पास है. वहीं, जेडीयू भी इस पद पर दावा कर रही है, जिसे लेकर दिल्ली और पटना में कई बैठक भी हुई हैं. हालांकि, सूत्रों का मानना है कि अगर इसपर सहमति नहीं बनती है तो यह पद जेडीयू और भाजपा के कैबिनेट वितरण को प्रभावित कर सकता है.

केंद्र में रहना चाहती है बीजेपी
भाजपा ने औपचारिक रूप से नीतीश को सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया था, लेकिन अमित शाह ने फैसला सहयोगियों पर छोड़ दिया है. यह फॉर्मूला न केवल सत्ता-साझेदारी के लिए है बल्कि भाजपा को बिहार की राजनीति के केंद्र में स्थापित करने के लिए भी है, जहां सालों से लालू-नीतीश की धुरी ही हावी रही थी, लेकिन इतनी सीटें पाकर बीजेपी अब वहां केंद्र में रहना चाहती है.

जिस तरह से महागठबंधन की हार हुई है उसने भाजपा की रणनीति की सफलता को साबित किया है. बता दें कि बिहार में 19 नवंबर को विधायी दल की बैठक होगी. बैठक के लिए भाजपा ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है, जबकि अर्जुन राम मेघवाल और साध्वी निरंजन ज्योति सह-पर्यवेक्षक होंगे. जेडीयू की बैठक में नीतीश कुमार को विधायी दल नेता चुना जाएगा.

20 नवंबर को शपथ समारोह
इसके अलावा जेडीयू नेता संजय झा और ललन सिंह ने अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात की. सूत्रों की माने तो इस बैठक में पोर्टफोलियो और स्पीकर पर चर्चा हुई. भाजपा राज्य नेताओं ने पटना में देर रात तक मंथन किया. 20 नवंबर को शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और धर्मेंद्र प्रधान सहित कई नेता उपस्थित होंगे. राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान शपथ दिलाएंगे. वर्तमान सरकार 19 नवंबर को भंग होगी.

भाजपा की यह जीत न केवल बिहार बल्कि ‘मिशन बंगाल’ जैसी अन्य रणनीतियों के लिए प्रेरणा बनेगी. राज्य में स्थिर सरकार बनने से विकास योजनाओं को गति मिलेगी, लेकिन गठबंधन की आंतरिक खींचतान भविष्य की चुनौतियां पैदा कर सकती है.

एनडीए की यह जीत 1951 के बाद बिहार का सबसे ऊंचा मतदान प्रतिशत (66.91%) पर आधारित है, जो एक ऐतिहासिक जनादेश माना जा रहा है. इस मुद्दे पर भाजपा के सहयोगी और केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री जीतन राम मांझी का कहना है कि हमने कोई मांग नहीं की है और भाजपा जो भी फॉर्मूला अपनाएगी उसपर हमें कोई आपत्ति नहीं है.

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