Friday, May 22, 2026

जमशेदपुर में देशभर के पर्यावरणविदों का जुटान हुआ.

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जमशेदपुर: पर्वतों और नदियों के संरक्षण विषय पर शुक्रवार को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित एक स्कूल के सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई. जिसमें देश भर के पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता, जल विशेषज्ञ और बुद्धिजीवी शामिल हुए. यह सम्मेलन जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय की पहल पर आयोजित किया गया है. सम्मेलन में देश के प्रसिद्ध जल संरक्षणवादी और पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह ने भी शिरकत की.

पर्वतों और नदियों के संरक्षण के लिए कानून बनाने पर जोर

उद्घाटन सत्र में विधायक सरयू राय ने कहा कि पर्वत भारत की पहली आधारभूत संरचना है. आज देश में नदियों और पर्वतों के संरक्षण के कानून बनाने की जरूरत है. सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा उपस्थित रहे, जबकि देश के प्रसिद्ध जल संरक्षणवादी और पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह सम्मेलन के मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए. इस दौरान विशेषज्ञों ने नदियों और पर्वतों के संरक्षण को लेकर विचार रखे. साथ ही वर्तमान समय में प्रकृति संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया.

प्रकृति का संरक्षण समाज के हर व्यक्ति का दायित्वः राजेंद्र सिंह

जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और जीवन का आधार पर्वत और नदियां हैं. यदि पर्वत सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो नदियां भी समाप्त हो जाएंगी और आने वाली पीढ़ियों के सामने जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाएगी. उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है. उन्होंने कहा कि पर्वत केवल भूगोल का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत की जल निरंतरता, पारिस्थितिक संतुलन, जैव विविधता, कृषि व्यवस्था और आपदा प्रतिरोधक क्षमता की मूल आधारशिला है.

Mountains and Rivers Conservation

कानून बनाने के लिए सांसदों की ली जाएगी मदद

सम्मेलन में प्रस्तावित संवैधानिक ढांचे भारतीय पर्वत निरंतरता एवं सुरक्षा अधिनियम 2026 पर भी चर्चा की गई है. उन्होंने कहा कि भारत में जंगल, खनन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के लिए कई कानून मौजूद हैं, लेकिन अब तक पर्वतों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए कोई ठोस संवैधानिक व्यवस्था नहीं बनाई गई है. जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि सम्मेलन में प्रस्तावित विषयों को संसद में उठाने के लिए सांसदों की मदद ली जाएगी. सांसद इस गंभीर मुद्दे को संसद में उठाएंगे और नया कानून बनवाने की पहल करेंगे.

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