लोहनगरी जमशेदपुर में कुड़मी अधिकार महारैली में मैदान खाली रहा. आंदोलनकारी कुड़मी नेता ने कहा कि कुड़मी नेताओं ने सहयोग नहीं किया लेकिन आंदोलन जारी रहेगा. 11 दिसंबर रांची में विशाल महारैली किया जाएगा.
जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित भोपाल मैदान कुड़मी अधिकार मंच के द्वारा कुड़मी अधिकार महारैली का आयोजन किया गया. बता दें कि झारखंड में कुड़मी जाति को एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर लगातार सभा रैली और आंदोलन किया जा रहा है. इस मुद्दे को लेकर रेल रोको अभियान भी किया जा चुका है.
कुड़मी नेताओं द्वारा राज्य के अलग अलग जिले मे लगातार चरणबद्ध तरीके से रैली की जा रही है. इसी के तहत जमशेदपुर में महारैली का आयोजन किया गया. महारैली को लेकर आयोजनकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर तैयारी की थी लेकिन कुड़मी अधिकार महारैली में सन्नाटा पसरा रहा. दर्शक दीर्घा के सभी कुर्सियां खाली रहीं कुछ ही लोग महारैली में दिखे जबकि मंच पर कुड़मी नेताओं ने अपना भाषण जारी रखा.
मंच से नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि आज कुड़मी समाज में समाज के कुछ नेता ही इस आयोजन को विफल करने मे लगे हुए हैं. लेकिन कुड़मी को उनके अधिकार की यह लड़ी दा रही लड़ाई तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार कुड़मी को एसटी में शामिल नहीं करती है. नेताओं ने मंच से पीले रंग गमछा लहराते हुए कहा कि जिस तरह बिहार में देश के प्रधानमंत्री गमछा लहराकर जीत का इजहार किया था आने वाले दिनों मे हम भी इसी तरह अपनी जीत इजहार करेंगे.

झारखंड आंदोलनकारी कुड़मी अधिकार महारैली के संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि कुड़मी समाज की महारैली को समाज के नेताओं ने साथ नहीं दिया. दर्शक दीर्घा खाली रहने पर कहा की यह समय धान कटाई का है और हम लोग सांसद विधायक नहीं है जो वाहनों का प्रबंध कर सके. यह भी कारण है कि यहां लोग नहीं आ सके.
वहीं आंदोलनकारी हरमोहन महतो ने जमशेदपुर लोकसभा सांसद विद्युत वरण महतो पर सीधा निशाना चाहते हुए कहा कि सांसद कुड़मी समाज के होने के बावजूद भी इनके द्वारा लोकसभा में इस मुद्दे को नहीं उठाया जा रहा है. जबकि 2002 में मयूरभंज के भाजपा सांसद सालखान मुर्मू ने लोकसभा में अपनी आवाज के जरिए ही संथाली को आठवीं अनुसूची में शामिल करवाया. वर्तमान में कुड़मी नेता ही समाज इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहे है लेकिन हमारा आंदोलन नहीं रुकेगा. आगामी 11 दिसंबर रांची मोहराबादी मैदान मे इस मुद्दे को लेकर विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा. जिसमे पूरे झारखंड से कुड़मी समाज के लोग शामिल होंगे.


