जमशेदपुरः लौहनगरी जमशेदपुर नवल टाटा हॉकी अकादमी परिसर में एशिया कप विजेता हॉकी खिलाड़ियों आशीष तानी पूर्ति और प्रेमचंद सोय को टाटा सटील के वीपीसीएस ने सम्मानित किया.
इस मौके पर टाटा स्टील के वीपीसीएस ने कहा की हमारे लिए गर्व की बात है. टाटा ग्रास रूट के खिलाडियों को प्रोत्साहित करने का काम करती है. वहीं भारतीय टीम को विजेता बनाने वाले खिलाडियों ने कहा कि छोटे से गांव से अपने खेल की शुरुआत की है. पाकिस्तान को हराने के बाद जापान को हराना एक चुनौती था.
जमशेदपुर के गोलमुरी क्षेत्र मे स्थित नवल टाटा हॉकी अकादमी में टाटा स्टील के वीपीसीएस ने एशिया कप विजेता हॉकी खिलाड़ी आशीष तांती और प्रेमचंद सोय को सम्मानित कर बधाई दी और उनका हौसला बढ़ाया. इस दौरान टाटा स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट हेड मुकुल चौधरी भी मौजूद रहे.
इस मौके पर टाटा स्टील के वीपीसीएस डी.बी. सुंदरा रामम ने कहा कि टाटा समूह शुरू से ही हॉकी जैसे पारंपरिक खेलों को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहा है. पूर्वी भारत के विभिन्न राज्यों में छिपी हुई खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने बताया की इस प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देखने को मिल रहा है.
इंडिया टीम को गोल्ड मेडल दिलाने वाले खिलाडी प्रेमचंद सोय और आशीष तानी पुर्ति खूंटी जिला के रहने वाले हैं. इन्होंने छह वर्ष की उम्र से ही हॉकी के प्रति अपनी रूचि बढ़ाते हुए खेलना शुरू किया. दोनों खिलाडियों ने बातचीत के दौरान अपनी बातों को साझा करते हुए बताया की पाकिस्तान और जापान के खिलाफ जीत दर्ज करना एक बड़ी चुनौती थी जिसे टीम ने पूरा किया.

उन्होंने बताया की सेमीफाइनल के हाई वोल्टेज मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ और फिर खिताबी भिड़ंत में मेजबान जापान के विरुद्ध शानदार खेल दिखाते हुए टीम की जीत पक्की की है. अंतरराष्ट्रीय अनुभव से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा. उन्होंने अपने प्रदर्शन के लिए नवल टाटा हॉकी अकादमी की सराहना करते हुए कहा कि यहां खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय आधुनिक सुविधाएं, कड़ी ट्रेनिंग और अनुभवी कोचों का सटीक मार्गदर्शन मिलता है. जिसका सीधा लाभ मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन में साफ झलकता है.
उन्होंने बताया कि हमारे गांव खूंटी में फुटबाल और क्रिकेट सभी खेलते हैं लेकिन बचपन से हम हॉकी खेल रहे हैं. यहां तक पहुंचने में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है, तब जाकर हमें सफलता मिली है. इस जीत की उपलब्धि पूरे झारखंड के युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगी. आशीष तानी ने बताया कि फ़ाइनल में जाने के बाद जापान को उसके ही क्षेत्र में हराना हमारे लिए काफी चुनौती था. रात भर हमारी टीम सोयी नहीं थी. हमलोगों ने संकल्प लिया की हरहाल मे हमें जीतना है और हमारे गोल से हमें सफलता मिली.
बता दें कि जापान में आयोजित अंडर-18 मेंस एशिया हॉकी कप में बेहतरीन प्रदर्शन कर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले नवल टाटा हॉकी अकादमी के दो युवा खिलाडी आशीष तानी पूर्ति और प्रेमचंद सोय से झारखंड ही नहीं देश का नाम रौशन हुआ है. दोनों खिलाड़ियों ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ तथा फाइनल में मेजबान जापान के विरुद्ध बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.


