छह महीने की गर्भावस्था, तीन बच्चों की ज़िम्मेदारी और घर में कोई साथ नहीं: एक महिला की अनकही कहानी
भारतसुपरफास्ट न्यूज़। आज की ख़बर एक ऐसी महिला की है जो छह महीने की गर्भावस्था में भी अकेले पूरा घर संभाल रही है। सवाल यह है कि ऐसे समय में परिवार और समाज कहाँ खड़ा है?
इस महिला के पहले से तीन बच्चे हैं और अब चौथे बच्चे की उम्मीद है। गर्भावस्था के छठे महीने में शरीर में दर्द और थकान के बावजूद उनकी दिनचर्या नहीं रुकती। सुबह तीनों बच्चों को नहलाना, स्कूल के लिए तैयार करना, मालिश करना, खाना खिलाना और घर के बाकी काम, सब कुछ वे अकेले करती हैं।
बताया जा रहा है कि इसी दौरान परिवार के एक करीबी रिश्तेदार का फ़ोन आया और उनकी माँ उन्हें इसी हालत में छोड़कर किसी आयोजन में शामिल होने चले गईं। महिला के लिए यह सिर्फ़ अकेलापन नहीं था, बल्कि उस समय सहारे की उम्मीद का टूटना भी था।
समाज से सवाल:
गर्भावस्था में महिला को आराम और देखभाल कब मिलेगी?
क्या यह सिर्फ़ महिला की ज़िम्मेदारी है, या पति और परिवार की भी?
क्या हम दूसरों के आयोजनों को अपनों की ज़रूरत से ऊपर रख रहे हैं?
हर गर्भवती महिला को देखभाल, सम्मान और सहारे का हक़ है। परिवार को ज़रूरत के समय साथ खड़ा होना चाहिए। ख़बरों के लिए बने रहिए भारत सुपर फास्ट न्यूज़ के साथ।
