नई दिल्ली: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेयर अर्थ एलिमेंट्स की आपूर्ति को लेकर भारत अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में म्यांमार से इन महत्वपूर्ण खनिजों की खरीद और उनके खनन में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है।
म्यांमार की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भारत और म्यांमार के बीच रेयर अर्थ खनिजों को लेकर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के बीच नई दिल्ली में हुई मुलाकात के दौरान भी व्यापार और रणनीतिक सहयोग के साथ महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े मुद्दे पर बातचीत हुई।
भारत में म्यांमार के राजदूत की ओर से भी संकेत दिया गया है कि दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
रेयर अर्थ मिनरल्स क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?
रेयर अर्थ एलिमेंट्स आधुनिक तकनीक और कई महत्वपूर्ण उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सोलर तकनीक, विंड टर्बाइन तथा रक्षा क्षेत्र से जुड़े उपकरणों में किया जाता है।
वैश्विक स्तर पर इन खनिजों की सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका है। चीन की ओर से रेयर अर्थ से जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों और नियंत्रण ने दूसरे देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने के लिए प्रेरित किया है।
भारत भी इसी वजह से अपनी सप्लाई चेन को ज्यादा सुरक्षित और विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए सरकार के नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
म्यांमार भारत के लिए क्यों अहम?
म्यांमार रेयर अर्थ खनिजों का एक प्रमुख उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। भारत के लिए भौगोलिक रूप से नजदीक होने के कारण भी म्यांमार से खनिज आपूर्ति का विकल्प रणनीतिक महत्व रखता है।
अगर दोनों देशों के बीच खनन और खरीद से जुड़ी व्यवस्था आगे बढ़ती है, तो इससे भारत को एक वैकल्पिक सप्लाई स्रोत मिल सकता है। इससे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
खनिज क्षेत्रों तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि म्यांमार से रेयर अर्थ खनिज हासिल करने की योजना आसान नहीं है। जिन क्षेत्रों में इन खनिजों के भंडार मौजूद हैं, वहां भौगोलिक परिस्थितियां और परिवहन सुविधाओं की कमी बड़ी बाधा हैं।
इसके अलावा, संबंधित इलाकों में लंबे समय से सैन्य बलों और स्थानीय सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष जारी है। कुछ प्रमुख खनन क्षेत्रों पर स्थानीय विद्रोही संगठनों का प्रभाव या नियंत्रण होने की खबरें भी सामने आती रही हैं।
ऐसे माहौल में खदानों से खनिज निकालना, उनकी ढुलाई करना और फिर उन्हें सुरक्षित तरीके से भारत तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत के लिए रणनीतिक विकल्प
रेयर अर्थ खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति केवल औद्योगिक जरूरत नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ी है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के विस्तार के साथ इन खनिजों की मांग बढ़ने की संभावना है।
ऐसे में म्यांमार के साथ सहयोग भारत को अपनी महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति के लिए एक अतिरिक्त विकल्प दे सकता है। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, खनन अधिकार और स्थानीय परिस्थितियों जैसी चुनौतियों का समाधान जरूरी होगा।
