नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक, सीएनजी और हाइड्रोजन से चलने वाले कमर्शियल वाहनों को लेकर एक अहम बदलाव का प्रस्ताव रखा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी मसौदा अधिसूचना में नेशनल परमिट के तहत संचालित इन वाहनों की निर्धारित परिचालन अवधि को 5 साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।
12 और 15 साल की सीमा में बदलाव का प्रस्ताव
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, जिन वाहनों के लिए वर्तमान में 12 साल की आयु सीमा लागू है, उनकी अवधि बढ़ाकर 17 साल की जा सकती है। इसी तरह 15 साल की मौजूदा सीमा वाले वाहनों के लिए इसे 20 साल करने का प्रस्ताव है।
यह बदलाव मुख्य रूप से पर्यावरण के लिहाज से बेहतर माने जाने वाले ईंधनों से संचालित वाणिज्यिक वाहनों पर लागू करने का प्रस्ताव है।
5 साल के लिए लिया जा सकेगा नेशनल परमिट
मसौदे में नेशनल परमिट की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की बात कही गई है। वाहन मालिक अब साल-दर-साल परमिट का नवीनीकरण कराने के बजाय एक साथ 5 साल की अवधि का विकल्प चुन सकेंगे।
नेशनल परमिट की वार्षिक फीस 16,500 रुपये प्रस्तावित है। इस हिसाब से पांच साल के लिए कुल शुल्क 82,500 रुपये होगा।
VAHAN डेटाबेस से कम होगी कागजी प्रक्रिया
मंत्रालय ने परमिट से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया है। प्रस्ताव के तहत केंद्रीय VAHAN डेटाबेस में उपलब्ध वाहन संबंधी जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे परमिट और रजिस्ट्रेशन से जुड़े फॉर्म में कई जानकारियां स्वतः उपलब्ध हो सकेंगी और वाहन मालिकों की कागजी कार्रवाई कम होगी।
अस्थायी पंजीकरण के नियमों में भी बदलाव
ड्राफ्ट में अस्थायी पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव भी शामिल है।
बिना बॉडी वाले चेसिस: ऐसे चेसिस को छह महीने के लिए अस्थायी पंजीकरण देने का प्रस्ताव है। बॉडी निर्माण या फिटमेंट में देरी होने जैसी परिस्थितियों में निर्धारित शुल्क के साथ इसे 30-30 दिनों की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ाया जा सकेगा।
दूसरे राज्य में जाने या रूपांतरण वाले वाहन: पूरी तरह तैयार वाहनों को किसी दूसरे राज्य में पंजीकरण के लिए भेजे जाने या वाहन में रूपांतरण किए जाने की स्थिति में 45 दिनों का अस्थायी पंजीकरण प्रस्तावित है।
30 दिनों में मांगी गई आपत्तियां और सुझाव
यह फिलहाल अंतिम नियम नहीं है। मंत्रालय ने प्रस्तावित बदलावों पर आम नागरिकों, ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों और ऑटोमोबाइल उद्योग से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के भीतर संबंधित पक्ष अपनी प्रतिक्रिया सरकार को भेज सकते हैं।
प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद मंत्रालय इन प्रावधानों को अंतिम रूप देगा।
