Monday, March 16, 2026

गेहूं की फसल को इस समय बढ़ते तापमान से भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। 

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बिहार में अचानक बढ़ते तापमान से रबी फसलों, खासकर गेहूं को नुकसान का खतरा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की डॉ. मनीषा टम्टा ने बताया कि तापमान वृद्धि से भूरा रतुआ रोग और माहू कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। किसानों को शाम को हल्की सिंचाई, पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव और कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है

पटना। बिहार में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। जहां अभी कुछ और ठंडे दिनों की जरूरत थी, वहीं राज्य में तापमान अचानक बढ़ने लगा है। इसका सीधा असर रबी फसलों की वृद्धि और विकास पर पड़ सकता है। खासकर गेहूं की फसल को इस समय बढ़ते तापमान से भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर) पटना की विज्ञानी डॉ. मनीषा टम्टा ने बताया कि मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में बिहार के अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक वृद्धि हो सकती है।

यह स्थिति रबी फसलों, विशेष रूप से गेहूं के लिए संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता है।

फसलों को बचाने के लिए कुछ प्रभावी उपाय

विज्ञानी डॉ. मनीषा के अनुसार, बढ़ते तापमान के दुष्प्रभाव से फसलों को बचाने के लिए कुछ प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि शाम के समय, जब हवा शांत हो, तब सभी रबी फसलों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए, जिससे खेत में नमी बनी रहे और तापमान का प्रभाव कम हो। 

इसके अलावा गेहूं की फसल में तने में गांठ बनने और शीर्ष निकलने के चरण में अथवा पुष्पन के बाद 0.2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट या 0.2 प्रतिशत पोटेशियम आर्थोफास्फेट अथवा दोनों का पत्तियों पर छिड़काव लाभकारी हो सकता है। 

गेहूं में भूरा रतुआ रोग लगने की संभावना

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तापमान में अचानक वृद्धि के कारण गेहूं में भूरा रतुआ रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। यदि खेत में इस रोग के लक्षण दिखाई दें, तो प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। 

इसके साथ ही, बढ़ते तापमान के कारण रबी फसलों में माहू या लाही कीट का प्रकोप भी बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को नियमित रूप से फसलों की निगरानी करते रहना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर समय पर कीट नियंत्रण के लिए अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करना चाहिए।

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