गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने विधान परिषद में बताया कि 2024 में बिहार में 19,768 अपहरण के मामले दर्ज हुए। इनमें से 14,000 से अधिक मामले शादी की नीयत से भगाने के थे। फिरौती या हत्या के इरादे से केवल 158 मामले थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट के आदेशानुसार 24 घंटे में गुमशुदा न मिलने पर अपहरण दर्ज होता है, जिससे संख्या बढ़ी दिखती
पटना। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को विधान परिषद में अपहरण के आंकड़ों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में राज्य में अपहरण शीर्ष के अंतर्गत 19 हजार 768 मामले दर्ज किए गए। यह जानकारी उन्होंने राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में दी। सदन में आंकड़े सामने आने के बाद सदस्यों के बीच चर्चा तेज हो गई। गृह मंत्री ने कहा कि सभी मामलों को गंभीरता से दर्ज किया गया है। साथ ही उन्होंने आंकड़ों का विस्तृत वर्गीकरण भी प्रस्तुत किया।
14 हजार से अधिक मामले शादी की नीयत से
सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि कुल दर्ज मामलों में 14 हजार से अधिक मामले शादी की नीयत से घर से भगाने के थे। इन मामलों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपहरण की श्रेणी में दर्ज किया जाता है
उन्होंने कहा कि सामाजिक कारणों और पारिवारिक असहमति के चलते ऐसे मामले सामने आते हैं। हालांकि, इन मामलों की प्रकृति अन्य गंभीर आपराधिक अपहरण से अलग होती है।
गृह मंत्री ने बताया कि वास्तविक आपराधिक मंशा वाले मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को अलग दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।
फिरौती और हत्या की नीयत के कम मामले
गृह मंत्री ने सदन को बताया कि केवल 158 मामलों में ही फिरौती या हत्या की नीयत से अपहरण किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। गंभीर अपराधों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। सरकार का दावा है कि संगठित अपराध पर नियंत्रण के प्रयास जारी हैं। इस संबंध में पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट के आदेश से बढ़े दर्ज मामले
सम्राट चौधरी ने बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुसार यदि गुमशुदा व्यक्ति की 24 घंटे में बरामदगी नहीं होती है तो अपहरण का मामला दर्ज करना अनिवार्य है। इसी प्रक्रिया के कारण अपहरण के मामलों की संख्या में वृद्धि दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि यह कानूनी प्रावधान पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। अब्दुल बारी सिद्दीकी के सवाल पर सरकार ने स्पष्ट किया कि आंकड़ों को संदर्भ सहित देखा जाना चाहिए।
गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि कानून-व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। सरकार अपराध नियंत्रण के लिए निरंतर प्रयासरत है।


