जबलपुर में एक दुकानदार खौलते तेल की कड़ाही में हाथ डालकर मंगोड़े और समोसे निकालता है, लेकिन उसके हाथ को कुछ नहीं होता है.
मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक दुकानदार खौलते तेल की कढ़ाई में हाथ डाल देते हैं और उनके हाथ में किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता. यह पढ़कर शायद आप आश्चर्यचकित हो गए होंगे. लेकिन ये बिल्कुल सही बात है और पिछले 107 सालों से लगातार ऐसा होता आ रहा है. हम बात कर रहे हैं जबलपुर स्थित एक नाश्ते की दुकान की. जहां मंगोड़े, समोसा सहित कई प्रकार का नाश्ता मिलता है. इसके संचालक अतुल जैन खौलते तेल की कढ़ाई में हाथ डालकर मंगोड़े को बाहर निकाल लेते हैं. अतुल जैन की मानें तो एक फकीर के आशीर्वाद से ये चमत्कार हो रहा है. इस आश्चर्य और अनोखे वाकये को विस्तार से जानते हैं.
‘खाने-पीने की है विश्व प्रसिद्ध दुकान’
लजीज व्यंजनों के लिए जबलपुर शहर अपनी अलग पहचान रखता है. शहर की सबसे घनी आबादी वाला बड़ा फुहारा चौक खाने-पीने की दुकानों को लेकर प्रसिद्ध है. यहां खाने-पीने की छोटी-बड़ी दुकानों को मिलाकर करीब 100 दुकाने हैं. इन सब में एक दुकान ऐसी है जो सबका ध्यान अपनी ओर खींचती है. हम बात कर रहे हैं उसी दुकान की जिसके संचालक खौलते तेल में हाथ डालकर समोसे और मंगोड़े निकाल लेते हैं.
यहां के समोसे, मंगोड़े, भजिया का स्वाद चखने दूर-दूर से लोग आते हैं. फुहारा चौक से करीब 100 मीटर दूर इस दुकान का नाम ‘देवा मंगोड़े वाले’ है. दुकानदार के अनुसार यह विश्व प्रसिद्ध दुकान है. यहां लोग सिर्फ जीभ के जायके या पेट की आग शांत करने नहीं आते हैं, बल्कि ज्यादातर लोग तो दुकानदार के हैरतअंगेज कारनामे को देखने चले आते हैं.
107 सालों से चल रही है नाश्ते की यह दुकान
दुकान के संचालक अतुल जैन बताते हैं कि “यह दुकान 1918 से चल रही है. पहले उनके दादा उसके बाद पिता स्व कंछेदीलाल जैन दुकान चलाते थे.” अतुल ने बताया कि “उनके पिता भी इसी तरह खौलते तेल की कड़ाही में हाथ डालकर समोसा या मंगोड़े निकाल लेते थे और हाथ में जरा सा भी कुछ नहीं होता था. उन्हें एक फकीर का आशीर्वाद प्राप्त था. जिस वजह से वो ऐसा कर पाते थे. कड़ाही में हाथ डालने की कला मैंने अपने पिता से सीखी है. उसी फकीर के आशीर्वाद से मैं भी खौलते तेल की कड़ाही में हाथ डाल देता हूं, लेकिन हाथ पर किसी भी प्रकार कोई फफोला या जलन नहीं होती. अतुल ने ईटीवी भारत के कैमरे सामने भी खौलते तेल की कड़ाही में हाथ डाला, लेकिन उन्हें कोई प्राब्लम नहीं हुई.

आसपास के लोग इसे विज्ञान नहीं बल्कि चमत्कार मानते हैं
जबलपुर के रहने वाले शरद दबे रोज यहां नाश्ता करने आते हैं. शरद का कहना है कि “उन्होंने अतुल के पिता को भी यह करतब करते हुए देखा है. वो भी इसी तरह खौलते तेल में हाथ डाल देते थे” विज्ञान के जानकार इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण मानते हैं, लेकिन अतुल जैन इसे उनके पिता के गुरु स्व. प्यारेलाल दादा टांगे वाले की कृपा मानते हैं. आसपास के लोग भी इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मानते.

इसके पीछे उनका मानना है कि खौलते हुए तेल की एक बूंद भी शरीर पर पड़ जाए तो लोग जलन व दर्द से कराह देते हैं. हाथ पर फफोले हो जाते हैं, लेकिन अतुल जैन प्रतिदिन और कई बार खौलते तेल की कड़ाही में हाथ डालते हैं और उन्हें कुछ भी नहीं होता. देखने वाले भी आश्चर्य से दांतों तले उंगली दबा लेते हैं.
‘हाथ पर लगा पानी स्किन जलने से बचाता है’
विज्ञान के जानकार संजीव कुमार पांडे का कहना है कि “अतुल जैन का यह करतब पूरी तरह वैज्ञानिक है. दरअसल, अतुल जब भी कढ़ाई में हाथ डाल रहे हैं तब उनके हाथ गीले रहते हैं. गीले होने की वजह से जैसे ही उनका हाथ कढ़ाई में जाता है पानी वाष्पित होने लगता है और चमड़ी और तेल के बीच में हवा की एक छोटी सी परत बन जाती है, जो गर्मी को चमड़ी तक नहीं पहुंचने देती. इसलिए अतुल का हाथ गरम तेल में जल नहीं पता. अतुल अब इसे करने में मास्टर हो गए हैं कि कितने जल्द उन्हें कड़ाई से अपने हाथ को निकालना है. यदि ज्यादा देर तक पर कढ़ाई में अपना हाथ रखेंगे तो इसके जलने की संभावना है.”