Tuesday, August 18, 2026

खर्राटे को नजरअंदाज न करें: कब यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है?

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नई दिल्ली: सोते समय कभी-कभार हल्के खर्राटे आना आम बात हो सकती है। लेकिन अगर खर्राटे तेज, लगातार और लंबे समय से हो रहे हैं, साथ ही नींद के दौरान सांस रुकने या बार-बार जागने जैसी समस्या भी हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) जैसी नींद संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

स्लीप एपनिया में नींद के दौरान सांस की ऊपरी नली बार-बार संकरी या बंद हो जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित हो सकती है और नींद की गुणवत्ता भी खराब होती है।

खर्राटे क्यों आते हैं?

नींद के दौरान गले और ऊपरी वायुमार्ग की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं। इससे सांस के रास्ते में जगह कम हो सकती है। हवा के गुजरने पर गले के आसपास के नरम ऊतक कंपन करते हैं, जिससे खर्राटे की आवाज पैदा होती है।

हर व्यक्ति के खर्राटे स्लीप एपनिया का संकेत नहीं होते। हालांकि, बहुत तेज खर्राटों के साथ सांस रुकना, हांफते हुए जागना या दिनभर अत्यधिक नींद आना जैसे लक्षण हों, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

स्लीप एपनिया और हृदय स्वास्थ्य

ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के दौरान सांस बार-बार बाधित होने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है। इसके जवाब में शरीर तनाव संबंधी प्रतिक्रियाएं शुरू करता है, जिससे हृदय गति और रक्तचाप में बदलाव हो सकते हैं।

यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक और हृदय की धड़कन से जुड़ी कुछ समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। स्लीप एपनिया को हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जाता है।

इसलिए केवल खर्राटों को देखकर हार्ट अटैक की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। लेकिन खर्राटों के साथ स्लीप एपनिया के अन्य लक्षण मौजूद हों, तो जांच कराना उपयोगी है।

क्या खर्राटों का कैंसर से भी संबंध है?

स्लीप एपनिया और कैंसर के बीच संभावित संबंध को लेकर वैज्ञानिक शोध जारी है। लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी और शरीर में होने वाली अन्य जैविक प्रक्रियाओं को लेकर शोधकर्ताओं ने संभावित संबंधों पर अध्ययन किया है।

हालांकि, सिर्फ खर्राटे आने को कैंसर का सीधा कारण मानना सही नहीं है। इस विषय में उपलब्ध शोध से निश्चित तौर पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को कैंसर होगा। इसलिए इस दावे को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।

हड्डियों पर भी पड़ सकता है असर

कुछ अध्ययनों में स्लीप एपनिया और हड्डियों के स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध की ओर संकेत मिला है। बार-बार ऑक्सीजन की कमी और शरीर में सूजन जैसी प्रक्रियाएं हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।

हालांकि, हड्डियों की कमजोरी का कारण केवल खर्राटों को नहीं माना जा सकता। उम्र, पोषण, शारीरिक गतिविधि और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी हड्डियों की सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

किन लक्षणों पर डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर खर्राटों के साथ निम्न समस्याएं दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है:

  • सोते समय सांस रुकने की शिकायत
  • नींद में हांफते या घुटन महसूस करते हुए जागना
  • सुबह उठने पर थकान या सिरदर्द
  • दिन में बहुत अधिक नींद आना
  • रात में बार-बार नींद खुलना
  • लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर स्लीप एपनिया की जांच के लिए स्लीप स्टडी (Sleep Study) कराने की सलाह दे सकते हैं।

जरूरी बात

खर्राटे हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होते। लेकिन लगातार और तेज खर्राटे, खासकर सांस रुकने जैसे लक्षणों के साथ, नींद से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में समय पर चिकित्सकीय जांच कराने से स्थिति की पहचान और उचित उपचार में मदद मिल सकती है।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी का निदान या उपचार तय करने के लिए योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

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