कैमूर, 26 अक्टूबर 2026। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में उद्योगों का विस्तार कर रोजगार के अवसर बढ़ाने और लोगों का पलायन रोकने का संकल्प दोहराया। कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड स्थित परसिया में चातुर्मास महायज्ञ के समापन पर आयोजित धर्म सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार को विकसित और समृद्ध राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने देश के भविष्य को लेकर कहा कि भारत अब केवल सोने की चिड़िया नहीं, बल्कि सोने का शेर बनेगा। उन्होंने बिहार में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने, धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने और मां मुंडेश्वरी धाम के विकास पर विशेष जोर दिया।
बिहार में उद्योग बढ़ाकर रोजगार देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में उद्योग-धंधों का विस्तार किया जाएगा, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़े। उनके अनुसार, राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने के लिए औद्योगिक विकास जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम करेगी, जिससे बिहार के युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इससे दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाने वाले लोगों की परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन के महत्व को भी रेखांकित किया।
पुराने बिहार और वर्तमान स्थिति का किया जिक्र
अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने बिहार के पुराने हालात और वर्तमान परिस्थितियों की तुलना की। उन्होंने वर्ष 1998-99 में कैमूर की यात्रा का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय स्थानीय लोगों ने उन्हें शाम के बाद यात्रा करने से सावधान किया था। लोगों ने रास्ते में डकैती की आशंका जताई थी।
मुख्यमंत्री ने इस घटना का उल्लेख करते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का दावा किया। उन्होंने कहा कि अब कैमूर की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों की ओर लोगों का ध्यान बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, फिल्मी हस्तियों और पर्यटकों की आवाजाही भी क्षेत्र की पहचान को विस्तार दे रही है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में हुए विकास कार्यों की सराहना भी की।
बिहार-झारखंड के औद्योगिक इतिहास का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने बिहार और झारखंड के पुराने संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि अलग राज्य बनने से पहले टाटा, बोकारो और खनन जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र अविभाजित बिहार का हिस्सा थे।
उन्होंने इस संदर्भ में बिहार की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया और कहा कि राज्य की समृद्धि के लिए उद्योगों का विकास आवश्यक है। उनके अनुसार, बिहार में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और लोगों को रोजी-रोटी के लिए अपने गांव तथा परिवार से दूर जाने की मजबूरी कम हो सकती है।
मां मुंडेश्वरी धाम के विकास और रोपवे पर जोर
मुख्यमंत्री ने कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी धाम के विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विकास कार्यों को गति देने की जरूरत है।
सम्राट चौधरी ने बताया कि धाम के जीर्णोद्धार और रोपवे निर्माण से जुड़े मुद्दों को लेकर संबंधित विभाग को आवश्यक पहल करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने धार्मिक स्थलों के विकास को पर्यटन विस्तार से जोड़ते हुए कहा कि बेहतर सुविधाओं से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने हरिहरनाथ मंदिर सहित बिहार के अन्य धार्मिक स्थलों के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन से बढ़ेंगी आर्थिक गतिविधियां
मुख्यमंत्री के अनुसार, बिहार में धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास से पर्यटन की संभावनाओं का विस्तार हो सकता है। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने पर स्थानीय कारोबार, परिवहन और पर्यटन से जुड़े अन्य क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैमूर में आयोजित धर्म सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, कानून-व्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को राज्य की प्रगति से जोड़कर अपनी बात रखी। उन्होंने दोहराया कि बिहार को विकसित और समृद्ध बनाने के लिए उद्योगों के विस्तार और पर्यटन स्थलों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।
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