Thursday, March 26, 2026

कैबिनेट द्वारा PESA नियमावली को मंजूरी मिलने के बाद, मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने सीएम हेमंत सोरेन को धन्यवाद दिया.

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रांचीः झारखंड में आदिवासी स्वशासन को सशक्त करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम पेसा के तहत तैयार नियमावली को मंजूरी दे दी गई. पंचायती राज विभाग के इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मामूली संशोधनों के साथ स्वीकृति दे दी है.

पेसा नियमावली के लागू होने से अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को व्यापक अधिकार और दायित्व प्राप्त होंगे. इसके तहत ग्राम सभा को स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पारंपरिक संस्थाओं की रक्षा, सामाजिक-आर्थिक निर्णयों में भागीदारी, विकास योजनाओं की निगरानी और स्थानीय विवादों के समाधान जैसी जिम्मेदारियां दी गई हैं. इससे गांव स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी और आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन प्रणाली को संवैधानिक संरक्षण मिलेगा.

इसी क्रम में राजधानी रांची स्थित ऑड्रे हाउस परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘जनजातीय शासन महोत्सव’ का समापन हुआ. समापन के अवसर पर पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग की मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर मुलाकात कर महोत्सव के सफल आयोजन और कैबिनेट से पेसा नियमावली लागू करने को लेकर धन्यवाद दिया.

PESA IN JHARKHAND

दो दिवसीय इस महोत्सव के दौरान पंचायती राज व्यवस्था, ग्राम सभा को सशक्त बनाने, पारंपरिक प्रशासनिक ढांचे को नई ऊर्जा देने जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया. खासतौर पर पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच गहन चर्चा हुई.

पेसा नियमावली को लागू करना सरकार की प्राथमिकता रहीः दीपिका पांडे सिंह

मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने महोत्सव के दौरान कहा था कि पेसा नियमावली को कैबिनेट से पारित कर इसे धरातल पर लागू करना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि जनजातीय समाज को उनके संवैधानिक अधिकार वास्तविक रूप में मिल सके. कैबिनेट की मंजूरी के साथ यह संकल्प अब औपचारिक रूप से साकार हो गया है.

समापन सत्र में मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि PESA एक्ट सिर्फ एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि आदिवासी समुदायों के आत्मसेम्मान, स्वशासन और भागीदारी के लिए एक मजबूत नींव है. राज्य सरकार इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ताकि गांव, ग्राम सभाएं और समुदाय विकास के मुख्य स्तंभ बन सकेेे.

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