Monday, March 23, 2026

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और United States के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते में भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को विशेष रूप से शामिल किया गया है.

Share

मुंबई: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत और United States के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते में भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को विशेष रूप से शामिल किया गया है. इससे देश को कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा वस्तुएं अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर मिल सकेंगी.

2030 तक 500 अरब डॉलर वार्षिक व्यापार का लक्ष्य
मंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है. प्रस्तावित व्यापार में ऊर्जा क्षेत्र की अहम हिस्सेदारी होगी.

गोयल ने कहा, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और देश की ऊर्जा मांग हर वर्ष लगभग 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. अधिक आपूर्तिकर्ता होने से भारत को बेहतर कीमतों पर कच्चा तेल मिल सकेगा.

आयात शुल्क में कटौती से व्यापार को बढ़ावा
पिछले सप्ताह दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमति की घोषणा की थी. इसके तहत कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम किया जाएगा.

अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा. वहीं भारत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों तथा कई कृषि और खाद्य वस्तुओं पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को गति मिलने की उम्मीद है.

इस्पात उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
गोयल ने बताया कि भारत वर्तमान में लगभग 140 मिलियन टन इस्पात का उत्पादन करता है, जो आने वाले वर्षों में दोगुना हो सकता है. इसके लिए कोकिंग कोल की मांग भी बढ़ेगी.

उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत कोकिंग कोल के लिए दो-तीन देशों पर निर्भर है और इसका आयात लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का है, जो बढ़कर तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. अधिक आपूर्तिकर्ता होने से प्रतिस्पर्धी कीमतें और आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित होगी.

आईटी और डेटा सेंटर क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री ने कहा कि अमेरिका के पास इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और वितरण से जुड़े उत्पादों में विशेष क्षमता है. भारत इन क्षेत्रों में अधिक पहुंच चाहता है, ताकि डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया जा सके.

उन्होंने बताया कि भारत का सूचना प्रौद्योगिकी निर्यात वर्तमान में लगभग 200 अरब डॉलर (करीब 18 लाख करोड़ रुपये) है. उन्नत अमेरिकी उपकरणों की उपलब्धता से यह क्षेत्र और मजबूत होगा तथा आईटी निर्यात बढ़कर लगभग 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.

ऊर्जा सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि व्यापार समझौते का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना ही नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करना है. विविध आपूर्ति स्रोतों से देश को बेहतर कीमत और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे उद्योग और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ मिलेगा.

Table of contents [hide]

Read more

Local News