रांची: झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कांके रोड स्थित कृषि निदेशालय में कृषक पाठशाला योजना की गहन समीक्षा की.
इस दौरान उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय से “कृषक पाठशाला” योजना को सफल बनाने का निर्देश दिया. मंत्री ने कहा कि समेकित बिरसा ग्राम विकास योजना सह कृषक पाठशाला योजना न सिर्फ सरकार और कृषि विभाग की बल्कि यह राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महत्वकांक्षी एवं फ्लैगशिप योजना है. जिसका उद्वेश्य कृषकों के अंदर देखकर सीखने की अवधारणा को विकसित करने के साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है.

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अधिकारियों के बीच बेहतर और सार्थक समन्वय जरूरी है. जिससे सभी तरह की अड़चनों और परेशानियों को दूर किया जा सकता है. आज कृषक पाठशाला योजना को धरातल पर उतारने के लिए विभागीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने की भी जरूरत है. जिससे कृषक पाठशाला संचालित करने वालों को मदद मिल सके.

कृषक पाठशाला संचालक का समय पर उनका पैसा मिले
कृषक पाठशाला का संचालन करने वाली एजेंसियों का बिल भुगतान समय पर हो. इसके लिए कृषि मंत्री ने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को दिसंबर माह तक का समय दिया है. राज्य में चार से पांच बेहतर कृषक पाठशाला को चिन्हित कर किसानों और दूसरे एजेंसियों को एक्सपोजर विजिट कराये जाने का भी निर्देश दिया.
इसके साथ ही मंत्री ने अगली समीक्षा बैठक में एजेंसियों को अपने-अपने कृषक पाठशाला का वीडियो तैयार कर प्रेजेंटेशन के लिए लाने का निर्देश दिया है. जिससे कृषक पाठशाला की हकीकत को देखा और समझा जा सके. इतना ही नहीं जिला कृषि पदाधिकारी भी बिल जमा करने से पहले कृषक पाठशाला का स्थल निरीक्षण कर काम का सत्यापन करेंगे.

इस समीक्षा बैठक में विभागीय सचिव अबू बकर सिद्दीकी, विशेष सचिव गोपाल तिवारी, विशेष सचिव प्रदीप हजारी, कृषि निदेशक भोर सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी और कृषक पाठशाला के संचालक एजेंसी के प्रतिनिधि मौजूद रहे. बता दें कि राज्य में अभी 50 से अधिक कृषक पाठशाला चलाया जा रहा है. इसकी संख्या बढ़ाकर 100 के करीब करने की योजना है ताकि राज्य के किसान अपनी परंपरागत खेती के तरीकों के अलावा आधुनिक और लाभकारी खेती की जानाकारी पा सकें.


