Wednesday, October 14, 2026

काम लिया है तो भुगतान करना होगा, अनुबंध बढ़ाने का आदेश न होने पर भी पैसा रोकने पर पटना हाईकोर्ट सख्त.

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पटना, 14 अक्टूबर 2026: पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार और सरकारी विभागों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि यदि अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद भी किसी कर्मचारी, एजेंसी या सेवा प्रदाता से काम लिया गया है, तो केवल अनुबंध विस्तार का औपचारिक आदेश नहीं होने के आधार पर उसका भुगतान रोका नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि जब विभाग ने काम कराया है और उससे लाभ भी प्राप्त किया है, तो संबंधित पक्ष को उसके काम का मेहनताना देने के मामले में कागजी प्रक्रिया का हवाला नहीं दिया जा सकता।

अनुबंध खत्म होने के बाद भी लिया गया काम

यह मामला एक रिट याचिका से जुड़ा था। याचिका के अनुसार, अनुबंध या निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी विभाग ने संबंधित पक्ष से काम लिया, लेकिन बाद में औपचारिक विस्तार आदेश नहीं होने का हवाला देकर भुगतान रोक दिया गया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति डॉ. अंशुमान की पीठ ने की। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि विभाग ने किसी व्यक्ति या एजेंसी से काम लिया है और उस काम का लाभ भी उठाया है, तो केवल औपचारिक अनुबंध विस्तार आदेश नहीं होने के आधार पर मेहनताना या बकाया राशि रोकने को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि विभाग अपनी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की कमी का भार उस व्यक्ति या एजेंसी पर नहीं डाल सकता, जिसने विभाग के लिए काम किया है।

कर्मचारियों और सेवा प्रदाताओं के लिए अहम फैसला

इस फैसले से उन कर्मचारियों, संविदाकर्मियों और सेवा प्रदाताओं के लिए राहत की उम्मीद है, जिन्हें अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद काम कराने के बावजूद भुगतान संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, भुगतान का अधिकार संबंधित मामले के तथ्यों, लागू नियमों और अदालत के आदेश के दायरे के अनुसार तय होगा। इस फैसले का संदेश है कि काम लेने के बाद केवल औपचारिक कागजी प्रक्रिया का हवाला देकर भुगतान से इनकार करने के मामले में विभागों को उचित कानूनी आधार प्रस्तुत करना होगा।

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