Sunday, October 25, 2026

कतरी नदी पर अवैध पुल बनाने के आरोप में BCCL अधिकारियों समेत 7 पर FIR, 24 घंटे में हटाने का निर्देश.

Share

धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा क्षेत्र में कतरी नदी पर कथित तौर पर बिना अनुमति पुल बनाने और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करने के मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के अधिकारियों समेत सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रशासन ने संबंधित पक्षों को 24 घंटे के भीतर पुल हटाने का निर्देश दिया है।

आरोप है कि कोयला परिवहन के लिए नदी के बीच आठ स्पैन वाला कच्चा पुल बनाया गया। इसके अलावा नदी के किनारे मिट्टी और ओवरबर्डन भरकर रास्ता तैयार किया गया, जिससे नदी के बहाव क्षेत्र के संकुचित होने की आशंका जताई गई है।

निरीक्षण में मिला आठ स्पैन वाला कच्चा पुल

मामले की जानकारी मिलने के बाद अंचलाधिकारी गिरिजानंद किस्कू ने स्थल का निरीक्षण किया। उनके अनुसार, मौके पर नदी के बीच आठ स्पैन का कच्चा पुल बना हुआ पाया गया। नदी के किनारे मिट्टी भरकर रास्ता तैयार किए जाने की बात भी सामने आई।

प्रशासन के मुताबिक, मौके पर मौजूद संबंधित लोगों से पुल निर्माण की अनुमति और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे। हालांकि, उपलब्ध कराए गए दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए।

इसके बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की गई। इस प्रकरण में BCCL के अधिकारियों और आरके कोल माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

24 घंटे में पुल हटाने का आदेश

अंचलाधिकारी गिरिजानंद किस्कू के अनुसार, संबंधित पक्षों को 24 घंटे के भीतर पुल हटाने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित समय में निर्देश का पालन नहीं होने पर प्रशासन ने बलपूर्वक पुल हटाने की चेतावनी दी है।

प्रशासन ने यह भी कहा है कि यदि पुल को हटाने के लिए सरकारी स्तर पर कार्रवाई करनी पड़ी, तो उस पर होने वाले खर्च की वसूली संबंधित पक्षों से की जाएगी।

मामले की रिपोर्ट उपायुक्त को भेजने की प्रक्रिया भी बताई गई है। प्रशासन का कहना है कि निर्माण के लिए जरूरी अनुमति और स्वीकृतियां ली गई थीं या नहीं, इसकी पड़ताल की जाएगी।

पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की भी होगी जांच

कतरी नदी में निर्माण और मिट्टी भराई से जुड़े मामले को देखते हुए जिला प्रशासन ने जल संसाधन विभाग, खनन विभाग, पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से समन्वय कर रिपोर्ट लेने की बात कही है।

जांच में यदि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष उठाने पर भी विचार किया जा सकता है।

नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आने से जल निकासी और आसपास के पर्यावरण पर प्रभाव पड़ने की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

BCCL की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस मामले में BCCL प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाएगा कि पुल निर्माण की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी और क्या इसके लिए आवश्यक विभागीय तथा पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त की गई थीं।

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। संबंधित लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

BHARAT SUPERFAST NEWS

Read more

Local News