नई दिल्ली: भारत में घर चमकाना अगले महीने से आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है. सिस्टमैटिक्स रिसर्च की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो पेंट कंपनियां अप्रैल 2026 से अपने उत्पादों के दाम में 2 से 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं.
कच्चे तेल का पेंट की कीमतों से क्या है संबंध?
पेंट उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 30-35%) कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स जैसे सॉल्वैंट्स और रेजिन से जुड़ा होता है. रिपोर्ट के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से जब भी कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन (मुनाफे) में लगभग 130 बेसिस पॉइंट (1.3%) की गिरावट आती है. इसी घाटे की भरपाई के लिए कंपनियां कीमतों में इजाफा करती हैं.
कंपनियां अभी क्यों हैं चुप?
हालांकि डीलरों को अप्रैल में कीमतों के बढ़ने की पूरी आशंका है, लेकिन एशियाई पेंट्स और बर्जर पेंट्स जैसी दिग्गज कंपनियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी बढ़ोतरी की घोषणा नहीं की है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां मार्च 2026 के अंत तक कच्चे तेल की चाल को और बारीकी से देखना चाहती हैं. वे यह समझना चाहती हैं कि क्या कीमतों में यह उछाल स्थायी है या इसमें कुछ सुधार की गुंजाइश है.
बाजार की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
कड़ी प्रतिस्पर्धा: इस क्षेत्र में कई नए खिलाड़ियों के आने से प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है. कंपनियां बहुत अधिक कीमत बढ़ाने से कतरा रही हैं क्योंकि उन्हें बाजार हिस्सेदारी खोने का डर है.
किफायती उत्पादों की मांग: वर्तमान में बाजार में प्रीमियम या लग्जरी पेंट के बजाय इकोनॉमी सेगमेंट (जैसे डिस्टेंपर और किफायती इमल्शन) की मांग तेजी से बढ़ रही है.
धीरे-धीरे बढ़ेंगे दाम: यदि कीमतें बढ़ती भी हैं, तो यह एक साथ नहीं बल्कि किस्तों में बढ़ाई जा सकती हैं. पहली छमाही (FY27 की पहली तिमाही) में इसका असर दिखना शुरू हो सकता है.
फिलहाल पेंट की मांग स्थिर बनी हुई है और बाजार में सिंगल डिजिट (मध्यम स्तर) की ग्रोथ देखी जा रही है. लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए सलाह यही है कि यदि आप घर पेंट कराने की योजना बना रहे हैं, तो मार्च का महीना आपके लिए आर्थिक रूप से बेहतर साबित हो सकता है, क्योंकि अप्रैल से कीमतों में बढ़ोतरी की पूरी संभावना बनी हुई है.


