हरियाली तीज हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक माना जाता है. इस दिन विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, प्रेम और पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की भक्ति भाव से पूजा करती हैं. यह व्रत खासतौर पर दांपत्य जीवन में खुशहाली लाने वाला माना जाता है.
ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ. सुभाष चौबे के अनुसार, इस वर्ष हरियाली तीज और भी खास है क्योंकि इस दिन ‘रवि योग’ बन रहा है, जो व्रत के प्रभाव को अत्यधिक शुभ बनाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज सावन मास की शुक्ल तृतीया तिथि को पड़ती है, जो 26 जुलाई शनिवार की रात 10:41 बजे शुरू होकर 27 जुलाई रविवार की रात 10:41 बजे तक रहेगी. लेकिन उदय तिथि के आधार पर यह तीज 27 जुलाई को मनाई जाएगी.
मां पार्वती का श्रृंगार सामग्री
हरियाली तीज पर पूजा करते समय माता पार्वती को विशेष श्रृंगार सामग्री अर्पित करना शुभ होता है. पूजा में हरे रंग की साड़ी या हरी-लाल चुनरी, सिंदूर, कंघी, बिछुआ, बिंदी, चूड़ियां, खोल, कुमकुम, मेहंदी, दर्पण और इत्र जैसी वस्तुएं मां पार्वती को चढ़ाना आवश्यक होता है. ये सभी चीजें माता के श्रृंगार एवं सम्मान के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.
हरियाली तीज पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें.
- पूजा स्थल को साफ करें, यदि संभव हो तो गोबर का लेपन करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें.
- घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें; मुख्यतः निर्जला व्रत रखा जाता है, पर यदि संभव न हो तो फलाहार व्रत भी कर सकते हैं.
- सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करें और विशेष रूप से हरे रंग की साड़ी, चूड़ियां, बिंदी आदि पहनें.
- पूजा के लिए माता पार्वती की चौकी सजाएं और मिट्टी या बालू से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा रखें.
- प्रतिमा या फोटो के सामने शिव-पार्वती का आवाहन करें.
- भगवान शिव का अभिषेक गंगाजल और पंचामृत से करें.
- माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
- बेलपत्र, धतूरा, सुपारी, अक्षत, फूल, फल, चंदन, नैवेद्य आदि अर्पित करें.
- व्रत कथा श्रद्धा से पढ़ें.
- आरती करें और प्रार्थना के साथ पूजा समाप्त करें.
- अगले दिन मिट्टी की प्रतिमा और पूजा सामग्री को बहते जल में विसर्जित करें.
हरियाली तीज के नियम
- व्रत मुख्य रूप से निर्जला रखा जाता है, लेकिन फलाहार व्रत भी स्वीकार्य है.
- इस दिन हरे रंग का विशेष महत्व होता है, इसलिए श्रृंगार में हरे रंग को जरूर शामिल करें.
- हाथों में मेंहदी लगाना जरूरी है, जिससे मां पार्वती की विशेष कृपा मिलती है.
- पूरे दिन शांति और भक्ति बनाए रखें और व्रत के नियमों का पालन करें.
धार्मिक महत्व
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है. यह अखंड सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम व खुशहाली लाने वाला व्रत माना जाता है. मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इसी कारण यह पर्व उनके पावन मिलन का प्रतीक है.


