Wednesday, March 18, 2026

इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण बल्लारी का जींस उद्योग केमिकल की कमी और बढ़ती लागत से जूझ रहा है, जिससे उत्पादन आधा हो गया है.

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बल्लारी (कर्नाटक): पश्चिम एशिया में गहराते इजरायल-इरान संघर्ष की गूंज अब कर्नाटक के मशहूर ‘जींस हब’ बल्लारी में सुनाई देने लगी है. युद्ध की विभीषिका ने न केवल भौगोलिक सीमाओं को प्रभावित किया है, बल्कि हजारों मील दूर बैठे बल्लारी के कपड़ा उद्यमियों और हजारों श्रमिकों की कमर तोड़ दी है. वैश्विक आपूर्ति सप्लाई चेन बाधित होने के कारण यहाँ का जींस उद्योग अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है.

केमिकल की कमी और आसमान छूती कीमतें
जींस निर्माण की प्रक्रिया में फिनिशिंग और धुलाई (वॉशिंग) के लिए हाइड्रोजन पेरोक्साइड, सोडियम हाइपोक्लोराइट और पोटेशियम परमैंगनेट जैसे रसायनों की भारी आवश्यकता होती है. बल्लारी के उद्यमी इन रसायनों के लिए खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर हैं. युद्ध के कारण समुद्री मार्ग बाधित होने से इन रसायनों की आवक लगभग रुक गई है.

इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. जो केमिकल पहले ₹40 प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध थे, उनकी कीमत अब ₹150 प्रति किलो को पार कर गई है. स्थानीय निर्माता इब्राहिम बाबू के अनुसार, रसायनों की बढ़ती कीमतों के कारण एक जींस की उत्पादन लागत में ₹100 से ₹150 तक की वृद्धि हो गई है. चूंकि ऑर्डर महीनों पहले बुक हो चुके होते हैं, इसलिए निर्माता अब बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों से नहीं वसूल पा रहे हैं, जिससे उन्हें प्रति पीस सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है.

निर्यात पर लगा ब्रेक
बल्लारी से हर साल उगादी और रमजान जैसे त्योहारों के दौरान खाड़ी देशों, विशेषकर दुबई में भारी मात्रा में जींस निर्यात की जाती है. इस साल लगभग 20 लाख जींस निर्यात करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन उत्पादन में 50% की गिरावट और लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है. निर्यात रुकने से उद्योग को करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है.

श्रमिकों और फैक्ट्रियों पर मंडराता संकट
बल्लारी और मुंदरागी जैसे क्षेत्रों में 500 से अधिक निर्माण इकाइयां और 30 से ज्यादा धुलाई इकाइयां कार्यरत हैं, जहां रोजाना लगभग 2 लाख जींस तैयार होती हैं. यहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवार अपनी आजीविका के लिए इस उद्योग पर निर्भर हैं. उत्पादन घटने से अब छंटनी और फैक्ट्रियों पर ताला लगने का डर सताने लगा है.

सरकारी हस्तक्षेप की मांग
मशहूर निर्माता मोहम्मद गौस और अन्य उद्यमियों ने सरकार से गुहार लगाई है कि इस संकट की घड़ी में उन्हें बिजली बिलों में छूट, टैक्स में राहत और केमिकल सब्सिडी प्रदान की जाए. यदि जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी, तो भारत की यह ‘जींस राजधानी’ अपनी पहचान खो सकती है.

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