Friday, July 3, 2026

आरबीआई ने क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बताते हुए संसदीय समिति से इसे कानूनी मान्यता न देने की सिफारिश की है।

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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को आगाह किया है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं. आरबीआई का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी को कानूनी मान्यता बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए. बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति के सामने आरबीआई ने यह बात मजबूती से रखी है.

देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा
समिति की बैठक में ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट और आगे की राह’ विषय पर चर्चा हुई. इस दौरान आरबीआई के अधिकारियों ने साफ किया कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है. केंद्रीय बैंक ने चिंता जताई कि इस डिजिटल पैसे का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने (टेरर फंडिंग) और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे खतरनाक और गैरकानूनी कामों में आसानी से किया जा सकता है.

विदेशी कंपनियों पर लगाम कसना मुश्किल
आरबीआई ने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह बताया कि क्रिप्टो करेंसी का व्यापार ज्यादातर भारत के बाहर सक्रिय विदेशी कंपनियों (ऑफशोर एंटिटीज) के जरिए होता है. इन बाहरी कंपनियों पर भारतीय रेगुलेटरी संस्थाओं के लिए नजर रखना और उन पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल है. अपनी बात को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने वैश्विक स्तर के उदाहरण भी दिए. केंद्रीय बैंक ने बताया कि चीन और कतर जैसे देशों ने इस तरह की सभी वित्तीय गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि यूरोपीय देशों ने इसे बहुत ही कड़े नियमों के दायरे में रखा हुआ है.

आईसीएआई (ICAI) ने दिया कानून का समर्थन
इसी संसदीय समिति के सामने देश की सबसे बड़ी चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्था, ‘इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICAI) ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी. आईसीएआई ने कहा कि वह वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए एक मजबूत और स्पष्ट कानून बनाने के पक्ष में है. संस्था ने भरोसा दिया कि वे सरकार और निवेशकों की मदद के लिए एक खास वित्तीय और अकाउंटिंग फ्रेमवर्क तैयार कर सकते हैं.

पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर
आईसीएआई ने सुझाव दिया कि वे विभिन्न प्रकार की डिजिटल एसेट्स के आर्थिक व्यवहार पर गहन रिसर्च कर सकते हैं. इस रिसर्च के आधार पर वे ऐसा गाइडेंस नोट या नियम तैयार करेंगे, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट और वित्तीय रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन को पारदर्शिता से दिखाया जा सके. इससे देश में टैक्स चोरी रुकेगी और डिजिटल संपत्ति का सही लेखा-जोखा मिल सकेगा.

संसदीय समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बैठक के बाद पुष्टि की कि रिजर्व बैंक देश में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी दर्जा देने के पूरी तरह खिलाफ है. उन्होंने यह भी बताया कि समिति फिलहाल आयकर कानून के तहत डिजिटल एसेट्स के ऑडिट और टैक्स से जुड़े पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है.

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