नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंच गई है. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के बयानों से साफ है कि दोनों देश इस ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहे हैं. इस समझौते के लागू होने से न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी, बल्कि व्यापार के नए रास्ते भी खुलेंगे.
अंतिम चरण की बातचीत शुरू
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर इस समय नई दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां वे केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकें कर रहे हैं. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर ग्रीर का स्वागत करते हुए लिखा कि दोनों देश एक मजबूत व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने इसे दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को गहरा करने वाला एक बड़ा कदम बताया है.
99% बातचीत पूरी, मध्य जुलाई की समयसीमा
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस समझौते का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा पहले ही फाइनल किया जा चुका है. अब दोनों देशों के अधिकारी केवल अंतिम 1 प्रतिशत तकनीकी और कानूनी पेचीदगियों को सुलझाने में जुटे हैं. इस महीने की शुरुआत में मुख्य वार्ताकार स्तर की सफल बैठकें हो चुकी हैं. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी भरोसा जताया है कि दोनों देश बचे हुए मुद्दों को जल्द ही सुलझा लेंगे और जुलाई के मध्य तक इस अंतरिम समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर हो सकते हैं.
24 जुलाई की समयसीमा और टैरिफ का दबाव
इस बातचीत में आई हालिया तेजी के पीछे 24 जुलाई की समयसीमा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दरअसल, अमेरिका द्वारा अपने व्यापारिक भागीदारों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी अतिरिक्त टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है. भारत इस समयसीमा से पहले समझौते को अंतिम रूप देकर अपने घरेलू विनिर्माण और तकनीकी क्षेत्रों को भविष्य के टैरिफ झटकों से सुरक्षित करना चाहता है.
इन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा फायदा
यह अंतरिम समझौता आगे चलकर एक बड़े व्यापक व्यापार समझौते का आधार बनेगा. प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को स्थानीय बाजारों की सुरक्षा के लिए इस सौदे से बाहर रखा गया है. वहीं, आईटी (IT), इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग) और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 220 अरब डॉलर को पार कर चुका है, और इस समझौते के बाद इसमें और अधिक उछाल आने की संभावना है. दोनों देशों के बाजारों में सैकड़ों वस्तुओं पर सीमा शुल्क (टैरिफ) कम होने से उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों को सीधा फायदा पहुंचेगा.


