Thursday, March 19, 2026

आतंक के कनेक्शन की जांच शुरू – संदिग्ध महिला आतंकी शमा परवीन की बैक ग्राउंड खंगाल रही ATS

Share

गुजरात एटीएस ने अल कायदा की संदिग्ध आतंकी महिला शमा परवीन को गिरफ्तार किया है. अब झारखंड एटीएस ने भी जांच तेज कर दी है.

रांची: गुजरात एटीएस द्वारा बेंगलुरु से गिरफ्तार संदिग्ध महिला आतंकी शमा परवीन के झारखंड के कोडरमा से संबंध सामने आने के बाद झारखंड एटीएस ने अपनी जांच शुरू कर दी है. शमा परवीन पर अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के ऑनलाइन आतंकी मॉड्यूल को संचालित करने का आरोप है. झारखंड एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या शमा का झारखंड में किसी आतंकी नेटवर्क से संबंध था और क्या उसका लिंक पहले पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल्स, जैसे डॉ. इश्तियाक अहमद और शबनम परवीन के नेटवर्क, से जुड़ा है.

झारखंड एटीएस, जो पहले से ही कई आतंकी मामलों की जांच में जुटी है, अब शमा परवीन के मामले में गहन पड़ताल कर रही है. झारखंड एटीएस के एसपी ऋषभ झा ने बताया कि गुजरात एटीएस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने शमा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं. इन सूचनाओं के आधार पर झारखंड एटीएस ने शमा के कोडरमा और अन्य संभावित स्थानीय संपर्कों की जांच शुरू कर दी है. उनका कहना है, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि शमा का झारखंड में कोई आतंकी कनेक्शन तो नहीं था. उसके परिवार, दोस्तों, और अन्य संदिग्धों की जानकारी खंगाली जा रही है.”

  • पिछले छह महीनों में झारखंड एटीएस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने झारखंड में अल-कायदा और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल्स का पर्दाफाश किया है. अगस्त 2024 में दिल्ली पुलिस और झारखंड एटीएस ने संयुक्त रूप से डॉ. इश्तियाक अहमद से जुड़े एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया था, जिसमें रांची, हजारीबाग और लोहरदगा से कई संदिग्ध गिरफ्तार हुए थे. इसके अलावा झारखंड एटीएस ने हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए धनबाद के वासेपुर से शबनम परवीन सहित पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया था. शमा परवीन की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या शमा का इन मॉड्यूल्स से कोई संबंध था.
  • गुजरात एटीएस के अनुसार, 30 वर्षीय शमा परवीन मूल रूप से झारखंड के कोडरमा जिले की रहने वाली है. वह कुछ समय तक हैदराबाद में रही और चार साल पहले बेंगलुरु के हेब्बल इलाके में अपने छोटे भाई के साथ किराए के मकान में शिफ्ट हो गई थी. गुजरात एटीएस ने बताया कि शमा सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम और फेसबुक, के जरिए जिहादी विचारधारा और गजवा-ए-हिंद जैसे कट्टरपंथी एजेंडे को बढ़ावा दे रही थी. उसके इंस्टाग्राम अकाउंट strangers_nation02 और फेसबुक पेज Strangers of The Nation और Strangers of The Nation 2 पर 14,000 से अधिक फॉलोअर्स थे, जहां वह अल-कायदा के नेता मौलाना असीम उमर और अन्य कट्टरपंथी नेताओं के भड़काऊ भाषण शेयर करती थी.

झारखंड एटीएस के एसपी ऋषभ झा ने बताया कि उनकी टीम गुजरात एटीएस के साथ लगातार संपर्क में है. जल्द ही झारखंड एटीएस की एक टीम शमा परवीन से पूछताछ के लिए गुजरात जाएगी. इसके साथ ही, कोडरमा में शमा के परिवार, दोस्तों और स्थानीय संपर्कों की गहन जांच की जा रही है. एसपी झा ने कहा, “हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या शमा का कोडरमा में कोई नेटवर्क था या वह अन्य संदिग्धों के साथ मिलकर काम कर रही थी.”

  • हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल से जुड़ी 20 वर्षीय शबनम परवीन की गिरफ्तारी ने पहले ही सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाया था. झारखंड एटीएस के अनुसार, शबनम न केवल अपने पति और अन्य संदिग्धों को जिहादी विचारधारा के लिए प्रेरित कर रही थी, बल्कि वासेपुर में स्थानीय युवाओं को भी कट्टरपंथ की ओर आकर्षित कर रही थी. उसके मोबाइल से बरामद संदेशों में देश-विरोधी सामग्री और उग्र प्रदर्शन के लिए उकसाने वाले तथ्य सामने आए थे. शबनम के साथ चार अन्य संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया था. इस मामले ने यह सवाल उठाया था कि क्या झारखंड में महिलाएं आतंकी संगठनों की नई रणनीति का हिस्सा बन रही हैं. शमा परवीन की गिरफ्तारी ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है.
  • 24 अगस्त 2024 को दिल्ली पुलिस और झारखंड एटीएस ने झारखंड सहित अन्य राज्यों में 16 स्थानों पर छापेमारी कर पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जिनमें रांची के डॉ. इश्तियाक अहमद, मतिउर रहमान, रिजवान बाबर और फैजान अहमद शामिल थे. इसके अलावा, छह अन्य संदिग्ध राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़े गए थे. ये सभी अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) का एक विस्तृत मॉड्यूल तैयार कर रहे थे. जांच में पता चला कि रांची के चान्हो, लोहरदगा के कुड़ू, और हजारीबाग में एक दर्जन से अधिक युवा इस मॉड्यूल से जुड़े थे.
  • दिल्ली पुलिस के अनुसार, डॉ. इश्तियाक इस मॉड्यूल का नेतृत्व कर रहा था और उसकी मंशा देश में “खिलाफत” की घोषणा कर गंभीर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना थी. पूछताछ में संदिग्धों ने कई अन्य युवाओं के नाम और पते साझा किए, जिन्हें ट्रेनिंग के लिए राजस्थान भेजने की तैयारी थी. हालांकि, छापेमारी के बाद कई स्लीपर सेल भूमिगत हो गए. झारखंड एटीएस ने इन संदिग्धों को नोटिस जारी किया है और उनकी तलाश जारी है.
  • झारखंड एटीएस अब यह जांच कर रही है कि क्या शमा परवीन का डॉ. इश्तियाक अहमद या शबनम परवीन के मॉड्यूल से कोई सीधा संबंध था. शमा के सोशल मीडिया अकाउंट्स और उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डिजिटल सबूतों में पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ संपर्क की पुष्टि हुई है. गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि शमा strangers_nation02 जैसे इंस्टाग्राम अकाउंट्स के जरिए जिहादी विचारधारा को बढ़ावा दे रही थी और वह कई पाकिस्तानी व्हाट्सएप अकाउंट्स से जुड़ी थी.
  • झारखंड लंबे समय से आतंकी संगठनों और उनके स्लीपर सेल्स का केंद्र रहा है. रांची, धनबाद, कोडरमा और हजारीबाग जैसे शहरों से कई संदिग्ध गिरफ्तार हो चुके हैं. इश्तियाक अहमद, फैजान अहमद, इल्ताफ अंसारी, मोहम्मद मोदब्बीर, मोहम्मद रिजवान, मुफ्ती रहमतुल्लाह, मतिउर रहमान, एनामुल अंसारी, शहबाज, अरशद, हसन अंसारी और उमर फारुख जैसे संदिग्धों की गिरफ्तारी ने झारखंड में आतंकी गतिविधियों की गंभीरता को उजागर किया है. शमा परवीन और शबनम परवीन की गिरफ्तारी ने यह सवाल उठाया है कि क्या आतंकी संगठन अब महिलाओं को अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाने की रणनीति अपना रहे हैं.
  • झारखंड एटीएस अब शमा परवीन के कोडरमा कनेक्शन, उसके परिवार, और संभावित स्थानीय संपर्कों की गहन जांच कर रही है. साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या शमा का नेटवर्क डार्क नेट या अन्य गुप्त संचार माध्यमों से संचालित हो रहा था. गुजरात एटीएस द्वारा बरामद दस्तावेजों, जैसे मैप, मोबाइल नंबर, और लोकेशन की जानकारी, की भी जांच की जा रही है.
  • झारखंड एटीएस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि शमा के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान हो सके. सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि स्लीपर सेल्स और ऑनलाइन आतंकी नेटवर्क तेजी से फैल रहे हैं, और इनका पता लगाना जटिल हो गया है.

Read more

Local News