Tuesday, July 7, 2026

आईटी सेक्टर की मजबूती के बावजूद सेंसेक्स-निफ्टी सीमित दायरे में बंद.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में जारी तेजी के सिलसिले पर मंगलवार को विराम लग गया. अंतिम घंटों में हुई मुनाफावसूली के कारण बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक मामूली गिरावट के साथ बंद हुए. रियल्टी और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया, जबकि आईटी और कंज्यूमर शेयरों ने निचले स्तरों पर सहारा दिया.

  • कारोबारी सत्र के समापन पर, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 104.35 अंक या 0.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,180.72 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक भी 31.65 अंक या 0.13 प्रतिशत फिसलकर 24,398.70 पर आ गया. व्यापक बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा, जहां निफ्टी मिडकैप में 0.30 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
  • निफ्टी 50 के लिए मुख्य तकनीकी स्तर
    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आगामी सत्रों के लिए निफ्टी का चार्ट स्ट्रक्चर बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां ऊपरी स्तरों पर 24,500 से 24,600 का क्षेत्र एक मजबूत तात्कालिक रेजिस्टेंस (अवरोध) बना हुआ है और बाजार में दोबारा बड़ी तेजी लौटने के लिए इस दायरे को पार करना अनिवार्य होगा. दूसरी ओर, यदि बाजार में मुनाफावसूली या सुधारात्मक गिरावट बढ़ती है, तो नीचे की तरफ 24,300 का स्तर पहले तात्कालिक सपोर्ट के रूप में कार्य करेगा, जिसके बाद 24,200 का जोन एक बेहद मजबूत डिमांड एरिया और बेस (आधार) का काम करेगा. मौजूदा बुलिश स्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए सूचकांक का इन स्तरों से ऊपर टिके रहना बेहद जरूरी है.
  • सेक्टोरल प्रदर्शन और मैक्रो ट्रिगर्स
    आज के सत्र में निफ्टी मेटल और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स सबसे बड़े लैकर्ड्स साबित हुए, जिन्होंने बेंचमार्क इंडेक्स को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई. इसके विपरीत, आगामी पहली तिमाही (Q1FY27) के अर्निंग्स सीजन से पहले निफ्टी आईटी इंडेक्स ने रक्षात्मक आउटपरफॉर्मेंस दिखाई. निफ्टी बास्केट में टाइटन कंपनी, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट में आई मजबूती के दम पर टॉप गेनर्स बनकर उभरे.

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका-ईरान संघर्ष और ट्रेड टैरिफ से जुड़ी चिंताएं कम होने से निवेशकों ने राहत की सांस ली है. अब घरेलू बाजार का पूरा ध्यान चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1FY27) के वित्तीय परिणामों और देश भर में मानसून की प्रगति पर स्थानांतरित हो गया है. इसके अतिरिक्त, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के सुधरते इनफ्लो और भारतीय रुपये की स्थिरता आने वाले समय में बाजार के डाउनसाइड रिस्क को सीमित रखेगी.

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