मुंबई: भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए. प्रमुख आईटी कंपनियों में भारी बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना रहा, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए. टेक्नोलॉजी सेक्टर में कमजोर रुख ने बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में हुई आंशिक खरीदारी को भी बेअसर कर दिया.
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 558.72 अंक यानी 0.66 प्रतिशत गिरकर 83,674.92 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी 146.65 अंक या 0.57 प्रतिशत टूटकर 25,807.20 के स्तर पर आ गया.
तकनीकी स्तरों पर दबाव बरकरार
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जब तक निफ्टी 25,840–25,900 के रेजिस्टेंस ज़ोन के नीचे बना रहता है और गिरते ट्रेंड चैनल में कारोबार करता है, तब तक अल्पकालिक रुख नकारात्मक रहेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 25,750 पर है और इसके नीचे फिसलने पर यह 25,700 तक जा सकता है.
हालांकि, 25,950 के ऊपर मजबूती से बंद होने पर ही बाजार की मौजूदा कमजोर संरचना में सुधार देखने को मिल सकता है.
आईटी सेक्टर बना सबसे बड़ा बोझ
गुरुवार को आईटी शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली. निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.51 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा. निवेशकों ने टेक कंपनियों में जमकर मुनाफावसूली की.
टॉप लूजर (Top Losers)
टेक महिंद्रा, इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक, महिंद्रा एंड महिंद्रा इन शेयरों में तेज गिरावट ने बाजार की धारणा को कमजोर किया.
इन शेयरों ने दिखाई मजबूती
हालांकि, कमजोर बाजार के बीच कुछ शेयरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया और सूचकांकों को आंशिक सहारा दिया, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), ट्रेंट
वित्तीय क्षेत्र में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिली और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 0.38 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ.
अन्य सेक्टरों का हाल
रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर भी दबाव में रहे. निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.45 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स 1.19 प्रतिशत गिरकर बंद हुए. वहीं, व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.47 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.64 प्रतिशत लुढ़क गए.
विश्लेषकों का मानना है कि आईटी दिग्गजों में आई तेज गिरावट और व्यापक बाजार में कमजोरी के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार नकारात्मक क्षेत्र में बंद हुआ. आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और सेक्टोरल रुझान बाजार की दिशा तय करेंगे.


