अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का में हुई बैठक तीन घंटे तक चली. ट्रंप ने कहा कि बैठक बहुत ही उपयोगी रही और कई बिंदुओं पर दोनों नेताओं के बीच सहमति बनी. हालांकि, अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है.
तेल खरीदारों पर टैरिफ का संकेत
ट्रंप ने कहा कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर तीन हफ्ते के भीतर टैरिफ लगाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि भारत और चीन रूस से तेल की भारी मात्रा में खरीद कर रहे हैं. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर सेकेंडरी टैरिफ लगाया गया, तो इसका प्रभाव विनाशकारी होगा. उन्होंने कहा कि अगर आवश्यकता पड़ी तो वह कदम उठाएंगे, लेकिन उम्मीद है कि ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
यूक्रेन संकट और शांति प्रयास
बैठक में यूक्रेन संकट पर भी चर्चा हुई. ट्रंप ने कहा कि यह समझौता शांति की दिशा में समाधान खोजने में मदद करेगा. उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को बैठक के परिणामों के बारे में अवगत कराने के लिए फोन करने की बात कही. ट्रंप ने दावा किया कि अगर वह 2022 में राष्ट्रपति होते, तो यूक्रेन में युद्ध नहीं होता.
अभी तक पूर्ण सहमति नहीं
ट्रंप ने माना कि कुछ बड़े मुद्दों पर पूरी तरह सहमति नहीं बनी है. उन्होंने कहा कि नाटो और अन्य अधिकारियों से फोन पर चर्चा करके आगे बढ़ेंगे. बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोई सवाल नहीं लिया. पुतिन ने आठ मिनट तक अपने विचार रखे, जबकि ट्रंप ने चार मिनट का संक्षिप्त वक्तव्य दिया.
भारत के लिए प्रभाव और भविष्य की दिशा
इस बैठक का भारत के लिए भी महत्व है, क्योंकि अमेरिकी प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% दंडात्मक शुल्क लगाने की योजना बनाई थी. हालांकि, किसी भी नेता ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया कि बैठक के बाद युद्धविराम होगा या नहीं. ट्रंप ने कहा कि अंतिम समझौते तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन इसके लिए अवसर मौजूद हैं.अलास्का में हुई इस बैठक ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी रहेगी. आगे की पहल शांति और तेल व्यापार के मुद्दों पर केंद्रित रहेगी. ट्रंप और पुतिन की यह बैठक भविष्य में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और यूक्रेन संकट पर अहम.


