Friday, July 17, 2026

अमेरिकी सीनेट में नया विधेयक, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव

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वाशिंगटन: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य रूस की आर्थिक आय पर दबाव बढ़ाना है। अमेरिकी सीनेट में प्रस्तुत इस प्रस्ताव में रूस से कच्चा तेल आयात करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है। प्रस्तावित देशों में भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अज़रबैजान शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट के 60 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।

रूस की आय सीमित करने पर जोर

“लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026” नाम से पेश इस विधेयक का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को कम करना और यूक्रेन युद्ध के लिए होने वाली वित्तीय मदद को सीमित करना बताया गया है। विधेयक में उन देशों को शामिल किया गया है, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहे हैं या प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने में उसकी मदद कर रहे हैं।

कुछ यूरोपीय देशों को प्रस्तावित छूट

प्रस्ताव में कुछ यूरोपीय देशों के लिए राहत का भी प्रावधान रखा गया है। जिन देशों का रूस से गैस आयात कुल रूसी गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम है और जो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं, उन्हें इस प्रस्तावित टैरिफ से छूट मिल सकती है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को हर 180 दिन में संबंधित देशों की समीक्षा करने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है।

अमेरिकी रणनीतिक हितों को रखा गया अलग

विधेयक में कुछ क्षेत्रों को इस प्रस्तावित टैरिफ से बाहर रखा गया है। इनमें अमेरिकी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए रूसी यूरेनियम की खरीद, चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग होने वाले आइसोटोप तथा अंतरिक्ष कार्यक्रमों से जुड़े अमेरिका-रूस सहयोग शामिल हैं।

भारत पर संभावित प्रभाव

यदि यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर इसका असर पड़ सकता है। भारत में इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष ने केंद्र सरकार से इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।

वहीं, कई आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं और घरेलू ईंधन कीमतों को ध्यान में रखते हुए सरकार को राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेना होगा। फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित विधेयक है और इसे कानून बनने से पहले अमेरिकी विधायी प्रक्रिया के कई चरणों से गुजरना होगा।

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