ताइवान: ताइवान को लेकर एशिया में भू-राजनीतिक तनाव तेजी से गहराता जा रहा है. इसी बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बड़ा और बेहद संवेदनशील फैसला लेते हुए ताइवान को अब तक की सबसे बड़ी हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है. करीब 11.15 अरब डॉलर (लगभग 98 हजार करोड़ रुपये) की यह डील ऐसे समय पर आई है, जब चीन लगातार ताइवान पर सैन्य और कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है. इस फैसले ने न केवल बीजिंग, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हलचल तेज कर दी है.
- ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हथियार सौदा राष्ट्रपति लाई चिंग-ते द्वारा नवंबर में घोषित किए गए 40 अरब डॉलर के सप्लीमेंट्री डिफेंस बजट का हिस्सा है. इस पैकेज में आर्टिलरी सिस्टम, एंटी-टैंक मिसाइलें, हेलिकॉप्टरों और एंटी-शिप मिसाइलों के स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं. राष्ट्रपति लाई पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ताइवान अपनी आत्मरक्षा क्षमताओं को तेजी से मजबूत करेगा और 2027 तक उच्च स्तर की कॉम्बैट रेडीनेस हासिल करने का लक्ष्य रखता है.
लाई चिंग-ते ने चेतावनी दी है कि चीन 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है. उन्होंने चीन पर ताइवान स्ट्रेट, ईस्ट और साउथ चाइना सी के साथ-साथ पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अभूतपूर्व सैन्य जमावड़ा और उकसावे वाली गतिविधियां बढ़ाने का आरोप लगाया है. ताइवान इस दौर को अपनी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मान रहा है.
इसी बीच ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि चीन का फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर ताइवान स्ट्रेट से होकर गुजरा. मंत्रालय ने बताया कि ताइवान की सशस्त्र सेनाओं ने स्थिति पर करीबी नजर रखी और आवश्यक जवाबी कदम उठाए.
अमेरिका द्वारा मंजूर इस हथियार पैकेज में 82 HIMARS रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम, 420 ATACMS मिसाइलें (300 किलोमीटर तक मारक क्षमता), ड्रोन सर्विलांस सिस्टम और सैन्य सॉफ्टवेयर शामिल हैं. इसके अलावा 60 M109A7 सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर सिस्टम और Javelin व TOW एंटी-टैंक मिसाइलें भी डील का हिस्सा हैं.
इस डील पर चीन की प्रतिक्रिया तीखी रही है. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी का हथियारों के सहारे अलगाव की कोशिश करना नाकाम होगा. बीजिंग का दोहराना है कि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है और उसका अलग होना स्वीकार्य नहीं है.
हालांकि अमेरिका और ताइवान के बीच कोई औपचारिक रक्षा संधि नहीं है, लेकिन 1979 का ताइवान रिलेशंस एक्ट अमेरिका को ताइवान की आत्मरक्षा के लिए आवश्यक हथियार उपलब्ध कराने की अनुमति देता है. इसी कानून के तहत अमेरिका लगातार ताइवान को सैन्य सहायता देता रहा है.


