पटना: मोकामा से विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चाएं तेज हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने के साथ उनकी विधायकी समाप्त करने की सिफारिश भी की है। हालांकि, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के अनुसार, विधानसभा कार्यालय को इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि आधिकारिक पत्र मिलने के बाद मामले की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
विधानसभा अध्यक्ष को आधिकारिक पत्र का इंतजार
अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की जेडीयू की सिफारिश पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में अखबारों में खबरें देखी हैं, लेकिन विधानसभा कार्यालय को अब तक कोई पत्र नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि पत्र प्राप्त होने के बाद उसकी समीक्षा की जाएगी और फिर कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। ऐसे में सदस्यता समाप्त होने को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
जेडीयू ने छह साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित
जेडीयू ने अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया है। खबर के मुताबिक, पार्टी ने पूर्व विधायक नीलम देवी के खिलाफ भी इसी अवधि के लिए निष्कासन की कार्रवाई की है।
पार्टी की ओर से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश किए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, किसी राजनीतिक दल से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। सदस्यता को लेकर फैसला संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होगा।
विधान परिषद चुनाव को लेकर बढ़ा विवाद
अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई के पीछे विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति से अलग रुख अपनाने को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था। इस दौरान चुनाव प्रचार और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर भी विवाद सामने आया।
इसके बाद पार्टी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की। हालांकि, इस मामले में पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों और संबंधित पक्षों के बयानों को आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर देखना जरूरी है।
पार्टी आदेश में अनुशासनहीनता के आरोप
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में अनंत सिंह पर पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने और नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए जाने की बात कही गई है।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने विधान परिषद चुनाव में अपने दल के उम्मीदवार के खिलाफ काम किया और दूसरे उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार किया। इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए जेडीयू ने निष्कासन का फैसला लिया।
क्या रद्द होगी अनंत सिंह की विधायकी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त होगी? फिलहाल इसका जवाब स्पष्ट नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के बयान के अनुसार, संबंधित पत्र मिलने के बाद ही मामले की समीक्षा और आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि अनंत सिंह की विधायकी रद्द हो गई है। अंतिम स्थिति विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई और लागू संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
BHARAT SUPERFAST NEWS
