मुंबई: Tata Group की होल्डिंग कंपनी Tata Sons Private Limited (TSPL) को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से बचाने के लिए Tata Trusts ने एक बड़े पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत Tata Electronics Systems Solutions (TESS) और Tata Consulting Engineers (TCE) का Tata Sons में विलय करने की योजना पेश की गई है। Tata Trusts का कहना है कि इससे कंपनी की नियामकीय स्थिति बदल सकती है और उसे अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी के रूप में बनाए रखने का रास्ता खुल सकता है।
RBI के नियमों से बाहर निकलने की कोशिश
Tata Sons पर RBI के Upper Layer NBFC नियम लागू हैं। कंपनी ने अपनी नियामकीय स्थिति बदलने की कोशिश की थी, लेकिन RBI की ओर से छूट नहीं मिलने के बाद लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने की स्थिति बनी। अब Tata Trusts ने वैकल्पिक रास्ते के तौर पर कंपनी के पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव के मुताबिक, दो ऑपरेटिंग कंपनियों को Tata Sons में मिलाने से होल्डिंग कंपनी के पास पर्याप्त प्रत्यक्ष कारोबारी गतिविधियां और ऑपरेटिंग रेवेन्यू होंगे। Tata Trusts का तर्क है कि इससे कंपनी की मौजूदा NBFC और CIC श्रेणी से बाहर निकलने की स्थिति बन सकती है।
₹1.05 लाख करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू
Tata Trusts के अनुसार, प्रस्तावित विलय के बाद संयुक्त इकाई का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 31 मार्च 2026 तक करीब ₹1,05,043 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले वित्तीय परिसंपत्तियों से होने वाली आय करीब ₹40,072 करोड़ बताई गई है। Trusts के मुताबिक, ऑपरेटिंग रेवेन्यू कुल आय का लगभग 64.3 फीसदी होगा।
प्रस्तावित संरचना में संयुक्त इकाई की शुद्ध संपत्ति करीब ₹2,00,158 करोड़ और समूह की कंपनियों में निवेश लगभग ₹1,77,120 करोड़ रहने का अनुमान दिया गया है। Tata Trusts का कहना है कि इससे समूह की कंपनियों में निवेश का अनुपात 90 फीसदी से नीचे आ जाएगा, जो CIC वर्गीकरण के लिए महत्वपूर्ण मानदंड है।
RBI की मंजूरी जरूरी
यह पुनर्गठन अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। Tata Trusts ने Tata Sons के बोर्ड से प्रस्ताव पर विचार करने और आवश्यक नियामकीय प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। प्रस्तावित विलय के लिए RBI से No-Objection Certificate (NOC) सहित अन्य मंजूरियां जरूरी होंगी।
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और नियामकीय शर्तें पूरी होती हैं, तो Tata Sons की संरचना में बड़ा बदलाव हो सकता है और कंपनी होल्डिंग के साथ-साथ प्रत्यक्ष ऑपरेटिंग कारोबार वाली इकाई के रूप में काम करेगी।
Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति को लेकर भी मतभेद
Tata Trusts और Tata Sons के बोर्ड के बीच यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब N. Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति और Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने Chandrasekaran की पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, Tata Sons ने अपने जवाब में नियुक्ति को वैध बताते हुए कहा है कि बोर्ड ने कंपनी के Articles of Association के अनुरूप फैसला लिया। यानी इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की कानूनी और प्रक्रियात्मक व्याख्या अलग-अलग है।
अब बोर्ड और RBI के फैसले पर नजर
Tata Trusts ने Tata Sons को पुनर्गठन प्रस्ताव पर आगे बढ़ने और RBI से आवश्यक मंजूरी लेने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। फिलहाल प्रस्ताव को Tata Sons के बोर्ड और संबंधित नियामकीय मंजूरियों से गुजरना होगा।
इसलिए Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर अंतिम स्थिति अभी तय नहीं हुई है। आगे का फैसला प्रस्तावित विलय, बोर्ड की मंजूरी और RBI की नियामकीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
BharatSuperFastNews | बिजनेस डेस्क
