हैदराबाद: स्पेसएक्स के विशाल रॉकेट Starship ने 28 सितंबर 2026 की टेस्ट फ्लाइट में एक अहम उपलब्धि हासिल की। कंपनी का दावा है कि स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की ऑर्बिट तक पहुंचने में सफल रहा। उड़ान के शुरुआती चरण में ऊपरी स्टेज के छह रैप्टर इंजनों में से एक बंद हो गया था, इसके बावजूद मिशन को आगे बढ़ाया गया।
टेक्सास स्थित स्पेसएक्स के Starbase से स्थानीय समयानुसार सुबह 7:48 बजे स्टारशिप ने उड़ान भरी। भारत के समय के मुताबिक यह करीब शाम 6:18 बजे था। यह स्टारशिप की 14वीं टेस्ट फ्लाइट बताई गई है।
एक इंजन बंद हुआ, फिर भी ऑर्बिट तक पहुंचा स्टारशिप
उड़ान के शुरुआती हिस्से में ऊपरी स्टेज के छह रैप्टर इंजनों में से एक के बंद होने के बाद मिशन को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी। शुरुआत में कंपनी की ओर से संकेत दिया गया कि ऑर्बिट तक पहुंचने का प्रयास रोका जा सकता है।
हालांकि, कुछ ही मिनटों बाद फ्लाइट कंट्रोलर्स ने मिशन को जारी रखने का फैसला किया। उनका आकलन था कि एक इंजन के काम नहीं करने के बावजूद स्टारशिप निर्धारित ऑर्बिट तक पहुंच सकता है।
लिफ्टऑफ के लगभग 25 मिनट बाद शिप ने एक रैप्टर इंजन को थोड़ी देर के लिए फायर किया और इसके बाद मिशन कंट्रोल ने स्टारशिप के ऑर्बिटल ट्रेजेक्टरी में पहुंचने की पुष्टि की। Starbase में मौजूद लोगों ने इस उपलब्धि का उत्साह के साथ स्वागत किया।
Super Heavy बूस्टर की भी हुई नियंत्रित लैंडिंग
Starship सिस्टम के निचले हिस्से यानी Super Heavy बूस्टर ने भी मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उड़ान के करीब सात मिनट बाद बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में नियंत्रित लैंडिंग की।
उड़ान के दौरान बूस्टर के कुछ इंजन बंद हुए, लेकिन इससे उसकी निर्धारित लैंडिंग प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।
यह मिशन Starship के Version 3 की तीसरी उड़ान भी है। पिछली उड़ानों की तरह इस बार भी दोनों लॉन्च प्रयासों के बीच करीब दो महीने का अंतर रहा।
26 Starlink V3 सैटेलाइट भी मिशन का हिस्सा
Starship 14 मिशन में 26 Starlink V3 सैटेलाइट भी शामिल हैं। इनमें से तीन सैटेलाइट पर कैमरे लगाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें लेने के लिए किया जाना है।
पूरे मिशन की अवधि करीब 10 घंटे निर्धारित की गई है। इस दौरान शिप के पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाने की योजना है। मिशन के अंतिम चरण में शिप को चिली के पास प्रशांत महासागर में उतारने की योजना है। इससे पहले की कुछ उड़ानों में स्प्लैशडाउन हिंद महासागर में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के नजदीक हुआ था।
Starlink नेटवर्क के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?
इस उड़ान में भेजे जा रहे Starlink V3 सैटेलाइट पिछली पीढ़ी के मुकाबले अधिक क्षमता वाले बताए जा रहे हैं। स्पेसएक्स के मुताबिक, एक Starship मिशन में भेजे जाने वाले V3 सैटेलाइट की क्षमता इतनी अधिक हो सकती है कि एक लॉन्च नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने में V2 Mini सैटेलाइट वाले कई Falcon 9 मिशनों के बराबर योगदान दे सके।
फिलहाल Starlink नेटवर्क में करीब 10,000 सैटेलाइट सक्रिय बताए जाते हैं। एलन मस्क भविष्य में इस नेटवर्क को करीब एक लाख सैटेलाइट तक ले जाने की योजना की बात कर चुके हैं।
जुलाई में Starship की 13वीं टेस्ट फ्लाइट के दौरान भी V3 सैटेलाइट भेजे गए थे, लेकिन उस मिशन में रॉकेट का प्रक्षेपवक्र सबऑर्बिटल था।
124 मीटर लंबा Starship, मंगल मिशन पर भी नजर
स्पेसएक्स के अनुसार Starship की ऊंचाई करीब 407 फीट यानी 124 मीटर है। कंपनी के स्पेसिफिकेशन के मुताबिक यह 100 मीट्रिक टन से अधिक पेलोड को ऑर्बिट तक ले जाने की क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है।
स्टारशिप के Super Heavy बूस्टर और शिप दोनों को दोबारा इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। एलन मस्क लंबे समय से इस सिस्टम को मंगल ग्रह तक इंसानों और सामान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल करने की योजना बताते रहे हैं। उनका लक्ष्य Starship को भविष्य में बेहद अधिक आवृत्ति के साथ लॉन्च करना है।
स्पेसएक्स अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर जैसी संभावित तकनीकों पर भी काम करने की योजनाओं का उल्लेख कर चुका है।
NASA के Artemis मिशन में भी Starship की बड़ी भूमिका
Starship का इस्तेमाल NASA के Artemis कार्यक्रम में भी प्रस्तावित है। NASA ने चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने के लिए Starship को एक मानव लैंडर के रूप में चुना है।
योजना के अनुसार Artemis III के तहत Starship को 2027 के मध्य में लो अर्थ ऑर्बिट तक पहुंचाने की योजना बताई गई है। इसके बाद Artemis IV मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतारने की योजना है।
हालांकि NASA ने लैंडर के लिए Blue Origin को भी चुना है। ऐसे में भविष्य के Artemis मिशनों में किस लैंडर का इस्तेमाल होगा, यह मिशन योजना और तैयारियों पर निर्भर करेगा।
BharatSuperFastNews | टेक डेस्क
