Thursday, March 26, 2026

SNMMCH में करीब 500 आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं, ये समान काम समान वेतन की मांग कर रहे हैं.

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शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल धनबाद में करीब 500 आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं. ये समान काम समान वेतन की मांग कर रहे हैं.

धनबाद: शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल धनबाद ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों के भरोसे का केंद्र है लेकिन इसी अस्पताल की नींव में अपनी मेहनत झोंकने वाले करीब 400 से 500 आउटसोर्सिंग कर्मचारी, अधिकार और उचित मेहनताना न मिलने पर संघर्ष कर रहे हैं. पिछले दस सालों से अपना योगदान दे रहे समान काम के बदले समान वेतन की मांग कर रहे हैं.

पारा मेडिकल महिला कर्मचारी रीना कुमारी का कहना है कि करीब 400 से 500 पैरामेडिकल स्टाफ अस्पताल में कार्यरत हैं. पिछले 10 सालों से संस्थान में सेवा देते आ रहे हैं. इसी संस्थान में रहकर अपनी पढ़ाई भी पूरी की लेकिन समान काम के बदले समान वेतन नहीं मिल पा रहा है. किराए के मकान में रहकर ड्यूटी कर रहे हैं. कम वेतनमान पर हमारा गुजारा आखिर कैसे हो सकेगा? वर्तमान में 15 हजार रूपए वेतन का भुगतान किया जा रहा है. किसी तरह की कोई भी छुट्टी नहीं मिलती है और ना ही किसी तरह की मेडिकल सुविधा मिल पाती है. पिछले 10 सालों से अस्पताल में कार्यरत हैं. वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन पर मुखर होते ही हमें काम से निकलने की धमकी दी जाती है.

कर्मचारी मुकेश कुमार दास ने बताया कि स्थाई कर्मचारियों की तरह हम भी अस्पताल में काम करते हैं लेकिन हमें समान काम के बदले समान वेतन नहीं दिया जाता है. स्थाई कर्मचारियों को 50 से 60 हजार वेतन मिलता है लेकिन हमें महज 15 हजार रूपये ही मिलते हैं. फ्रंटलाइन एजेंसी में हम काम करते हैं. कल के दिन यदि ये एजेंसी चेंज होती है तो हम बेरोजगार हो जाएंगे.

हम अपने कर्मचारियों को प्रावधान के तहत न्यूनतम मजदूरी देते हैं. टेंडर में जो भी नियम निहित है, उसे पर अमल किया जा रहा है. वहीं उन्होंने कार्य से निकलने की धमकी के संबंध में कहा कि कर्मचारियों द्वारा लगाए गए यह आरोप बेबुनियाद हैंसुजीत कुमार शर्मा, सीनियर मैनेजर, एजेंसी फ्रंटलाइन

आउटसोर्सिंग बनी समस्या की वजह

आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित कर्मियों के मुकाबले बहुत कम सैलरी दी जाती है. आधी से ज्यादा सुविधाएं, जैसे छुट्टियां या मेडिकल बेनेफिट्स भी इनसे छिन जाते हैं.

सरकार और प्रबंधन से सवाल

सरकार की कई योजनाएं मजदूरों और कर्मचारियों के कल्याण के लिए बनाई गई हैं लेकिन ये सवाल उठता है कि उनका फायदा ऐसे कर्मचारियों को क्यों नहीं मिल पा रहा? क्या यह अस्पताल का प्रबंधन या आउटसोर्स एजेंसी की लापरवाही है? या फिर सरकार को स्थाई कर्मचारियों की तरह वेतन देने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा या फिर सरकार को इनके लिए अलग से पहल करने की जरूरत है.

आवाज उठाने की जरूरत

इन कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने और हल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए. नियमितीकरण, उचित वेतन और बेहतर कामकाजी हालात जैसी मांगें पूरी हो तो न सिर्फ इनकी जिंदगी बदलेगी बल्कि अस्पताल की सेवाओं में भी सुधार होगा.

Outsourcing staff of SNMMCH

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