मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत मजबूती के साथ की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में सरकारी बैंकों के शेयरों में खासा उत्साह दिखा, जबकि मेटल, मीडिया और रियल्टी समेत कई सेक्टर्स में भी खरीदारी देखने को मिली।
सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा चढ़ा
बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 400 अंक यानी 0.60 फीसदी की तेजी के साथ 72,340.95 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 में 100 से अधिक अंकों की बढ़त दर्ज हुई और यह 0.49 फीसदी ऊपर 22,532.40 के स्तर पर खुला।
लगातार आठ सप्ताह की कमजोरी के बाद बाजार में आई यह तेजी निवेशकों के लिए राहत वाली मानी जा रही है। शुरुआती कारोबार में अधिकांश प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी का रुख देखने को मिला।
PSU बैंक इंडेक्स में करीब 1 फीसदी की तेजी
सोमवार की शुरुआती तेजी में सरकारी बैंकिंग शेयर सबसे आगे रहे। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
बाजार जानकारों के मुताबिक, रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा है। इसका असर बैंकिंग शेयरों की धारणा पर पड़ा है।
इसके अलावा रियल्टी इंडेक्स करीब 0.93 फीसदी ऊपर रहा। मीडिया और मेटल शेयरों में भी खरीदारी का रुझान मजबूत रहा। केमिकल, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस से जुड़े शेयरों में करीब 0.8 से 0.85 फीसदी तक की तेजी देखी गई।
वहीं फार्मा और आईटी शेयर अपेक्षाकृत स्थिर रहे, जबकि हेल्थकेयर इंडेक्स में हल्की कमजोरी नजर आई।
बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें
अमेरिका से मिले संकेत
अमेरिका के हालिया रोजगार आंकड़े अपेक्षाकृत कमजोर रहने के बाद निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी को फिलहाल टाल सकता है। इससे वैश्विक बाजारों की धारणा में सुधार हुआ है।
कच्चे तेल के दाम में नरमी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 1 फीसदी नीचे आई। ब्रेंट क्रूड लगभग 101.27 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल में नरमी सकारात्मक संकेत मानी जाती है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों का सपोर्ट
पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने करीब ₹9,484 करोड़ की बिकवाली की। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने लगभग ₹10,041 करोड़ की खरीदारी की, जिससे बाजार को सहारा मिला।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद कई बड़े शेयरों के मूल्यांकन निवेशकों को आकर्षक लग रहे हैं। सितंबर में ऑटो बिक्री के बेहतर आंकड़ों ने भी घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।
हालांकि, बाजार के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली अब भी अहम जोखिम बने हुए हैं। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेतों, ब्याज दरों और विदेशी निवेश के रुख से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।
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