मुंबई: वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई और प्रमुख सूचकांकों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।
बीएसई सेंसेक्स 593.43 अंक यानी 0.79 प्रतिशत फिसलकर 74,309.16 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 207.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,270.30 के स्तर पर खुला।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बाजार पर दबाव
पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 108.27 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी से देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में उछाल का असर शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशकों पर नजर
बाजार के लिए दूसरी बड़ी चिंता अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि रही। अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.96 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है।
यील्ड बढ़ने की स्थिति में अमेरिकी बाजार विदेशी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं। इसका असर उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है और भारतीय इक्विटी बाजार में भी दबाव बढ़ सकता है।
मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी दिखाई दी। मेटल और रियल्टी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा।
निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2.46 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स लगभग 1.75 प्रतिशत नीचे रहा। इसके अलावा सरकारी और निजी बैंकों के साथ ऑटो सेक्टर में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। आईटी सेक्टर में हालांकि तुलनात्मक रूप से सीमित कमजोरी रही।
एशियाई बाजार भी दबाव में
पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता का असर दूसरे एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जापान का निक्केई करीब 2.90 प्रतिशत, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 2.44 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंचे स्तरों के बाद घरेलू बाजार में करेक्शन की संभावना पहले से थी। वैश्विक घटनाक्रम और महंगे कच्चे तेल ने इस दबाव को और बढ़ा दिया।
IPO बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी कायम
शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद प्राथमिक बाजार को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। 17 सितंबर को खुलने वाले NSE के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर बाजार में खासा उत्साह है।
ऐसे में कुछ निवेशकों की नकदी सेकेंडरी मार्केट के बजाय आगामी आईपीओ में इस्तेमाल होने की संभावना भी बाजार के मौजूदा दबाव की एक वजह मानी जा रही है।
